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साये

साये पहले   साये  चलते थे  अब बोलने  लगे,मेरी  हंसी दुनियाँ में ज़हर घोलने लगेजब रात गहरायी आंखें बंद होने लगी,तो सपनों में डरावने  मंज़र दौड़ने लगेजैसे  कोई तहक़ीकात कर रहा हो मेरी,सारे  गुनाहों 
 
SURINDER RATTI
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खता

खता हम गल्तियाँ अक्सर रोज़ ही किया करते हैं,ये भी सच है  के  दोष दूजे को  दिया  करते  हैं ये   फितरत   है,   शरारत  है  या  नादानी  कोई,सबक लेने   की न सोच
 
SURINDER RATTI
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अहवाले बशर

अहवाले बशर ये   नुक्स-ए-आबो-हवा  देखी  ज़माने में,सदियां लग जाती लोगों को समझाने में ये दौर-ए-गर्दिश है, इम्तहां लेता सबका,  हर शख्स   मसरूफ नसीबा चमकाने में  यहां जुर्म को बेरोकटोक रक्स करते देखा,इंसाफ 
 
SURINDER RATTI