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दर कदम दर चल राही

 रे राही ,रे राही रेना कर अभिमानदर कदम दर चलनहीं तोगिर तू जायेगाना सोच सीधेसातवाँ आसमां पाने कीरे राही ,रे राही रेधीरे चलपायेगा तू हर आसमांदर कदम दर चलकरेगा तू हर आसमां को पाररे राही रे ...
 
संजय भास्कर
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दर कदम दर चल राही

रे राही ,रे राही रे ना कर अभिमान दर कदम दर चल नहीं तो गिर तू जायेगा ना सोच सीधे सातवाँ आसमां पाने की रे राही ,रे राही रे धीरे चल पायेगा तू हर आसमां दर कदम दर चल करेगा तू हर आसमां को पार रे राही रे ... हमारे मित्र आमीन के ब्लॉग से ये कुछ पंक्तियाँ.... आप
 
संजय भास्कर