व्यंग्य लेख हरिभूमि में प्रकाशित
गोपनीय या ओपनीयआज मैं श्री तेंदुलकर जी के बारे में चर्चा चलाना चाहता हूं, रोकना मत... वैसे जो बात ढकी दबी रहनी चाहिए, उसे ये गेंद की तरह उछालना चाहते हैं। बुजुर्गों ने कहा है...भजन-भोजन एकांत में। भोजन का मतलब है, खाना-पीना। अब श्री तेंदुलकर जी को कौन
Apr 23 2010 02:09 PM



Shuffle








