संसार अन्धकारमय दिखाई देता था
राजकीय घोषणा के पश्चात जब मैं शाहजहाँपुर आया तो शहर की अदभुत दशा देखी । कोई पास तक खड़े होने का साहस न करता था । जिसके पास मैं जाकर खड़ा हो जाता था, वह नमस्ते कर चल देता था । पुलिस वालों का बड़ा प्रकोप था । प्रत्येक समय छाया की भांति पीछे-पीछे [...]
Feb 01 2009 02:13 AM



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