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लोकधर्म (भाग -२)

लोकधर्म - (ले . श्री आचार्य रामचंद्र शुक्ल की पुस्तक " गोस्वामी तुलसीदास " से- ) **************************इसाई ,बौद्ध ,जैन इत्यादि वैराग्यप्रधान मतों में साधना के जो धर्मोपदेश दिए गये , उनका पालन अलग अलग कुछ व्यक्तियों ने चाहे किया हो, पर सारे समाज ने