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रामचरित मानस की अर्थ संरचनाएं

       रामचरित मानस लोक-महाकाव्य है। इसके उपयोग और दुरूपयोग की अनंत संभावनाए हैं।लोक-महाकाव्य एकायामी नहीं बल्कि बहुआयामी होता है,इसमें एक नहीं एकाधिक विचारधाराएं होती हैं। इसका पाठ संपूर्ण और बंद होता है किंतु अर्थ- संरचनाएं खुली
 
जगदीश्‍वर चतुर्वेदी
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तुलसीदास की नैतिकता का आधार है 'जिम्मेदारी' और 'वफादारी'

      तुलसी के मानस की हजारों किस्म की व्याख्याएं प्रचलन में हैं,इसका प्रधान कारण है इसकी भाषा का अनखुलाभाव।यह भाषा प्रतीक के लिहाज से ही अनखुली नहीं है,बल्कि संस्कृति के लिहाज से भी अनखुली है।अपूर्ण है। इसके बावजूद तुलसी के मानस को
 
jagadishwar chaturvedi
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रामचरित मानस में वायनरी अपोजीशन और हिन्दू अस्मिता के खेल

( अस्मिता साहित्य के महाकवि गोस्वामी तुलसीदास) ( सामयिक हिन्दू अस्मिता के नायक लालकृष्ण आडवाणी)           वायनरी अपोजीशन सिर्फ विलोम भाषिक रूपों में ही नहीं होता,बल्कि वह लोककथा संरचना,
 
jagadishwar chaturvedi
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आओ देरिदा की दृष्टि से महाकवि तुलसीदास को पढ़ें

             (महाकवि तुलसीदास)          फ्रांस के आलोचक और दार्शनिक ज्यॉक देरिदा की "वायनरी अपोजीशन" की धारणा 'रामचरितमानस' के मूल्यांकन में हमारी बेहतर मदद कर सकती है। आमतौर पर हिन्दी के
 
jagadishwar chaturvedi
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पुराने मानकों के परे तुलसीदास

      तुलसीदास के बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने 'मर्यादापुरूष ' के रुप में श्री राम का चित्रण किया और इसके लिए 'लोकमर्यादा' को आधार बनाया।यह धारणा वास्तविकता से मेल नहीं खाती। रामचरित मानस की समूची परिकल्पना पुरानी 'इच्छा',
 
jagadishwar chaturvedi
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पितृसत्ता से भागते हिन्दी आलोचक

                                                हिन्दी की अधिकांश आलोचना मर्दवादी है।इसमें पितृसत्ता के प्रति
 
jagadishwar chaturvedi
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तुलसी की दृष्टि में सबसे बड़ा धर्म है दीनों की सेवा,सबसे बड़ा पाप है उनका उत्पीड़न

         रामचरित मानस लोक-महाकाव्य है। इसके उपयोग और दुरूपयोग की अनंत संभावनाए हैं।लोक-महाकाव्य एकायामी नहीं बल्कि बहुआयामी होता है,इसमें एक नहीं एकाधिक विचारधाराएं होती हैं। इसका पाठ संपूर्ण और बंद होता है किंतु अर्थ- संरचनाएं
 
जगदीश्‍वर चतुर्वेदी
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रामचरित मानस की व्याख्या-कुव्याख्या के परिणाम

       रामचरित मानस लोक-महाकाव्य है। इसके उपयोग और दुरूपयोग की अनंत संभावनाए हैं।लोक-महाकाव्य एकायामी नहींहै बल्कि बहुआयामी होता है,इसमें एक नहीं एकाधिक विचारधाराएं होती हैं। इसका पाठ संपूर्ण और बंद होता है किंतु अर्थ- संरचनाएं खुली
 
जगदीश्‍वर चतुर्वेदी
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रामचरित मानस विमर्श के नए पैराडाइम की तलाश में -3-

         (आचार्य रामचन्द्र शुक्ल)       परंपरा और इतिहास के नाम पर हिन्दी का समूचे विमर्श के केन्द्र में तुलसीदास के मानस को आचार्य शुक्ल ने और कबीर को आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने आधार बनाया। सवाल किया
 
jagadishwar chaturvedi
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रामचरित मानस विमर्श के नए पैराडाइम की तलाश में -2-

             (स्व.रामविलास शर्मा)         (आलोचक नामवर सिंह)      हिन्दी आलोचना की नजर में रामचरित मानस एक ऐतिहासिक पाठ है,ऐतिहासिक पाठ के रूप में ही उसे देखने और व्याख्यायित
 
jagadishwar chaturvedi
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रामचरित मानस विमर्श के नए पैराडाइम की तलाश में -1-

      रामचरित मानस लोक-महाकाव्य है। इसके उपयोग और दुरूपयोग की अनंत संभावनाए हैं।लोक-महाकाव्य एकायामी नहीं बल्कि बहुआयामी होता है,इसमें एक नहीं एकाधिक विचारधाराएं होती हैं।  इसका पाठ संपूर्ण और बंद होता है किंतु अर्थ- संरचनाएं
 
jagadishwar chaturvedi
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खिचरी के तिउहार पै सबका सुभकामना ....... '' उत्सव प्रियाः खलु मनुष्याः'' ........

पढ़ैयन का राम राम !!!................... खिचरी के तिउहार  पै सबका सुभकामना ........................' अवधी कै अरघान ' की महफ़िल मा आप सबकै स्वागत अहै
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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तुलसीदास

तुलसीदास जी का जन्म उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले में स्थित राजापुर नामक ग्राम में संवत् 1554 की श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन हुआ था. उनके पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी देवी था. ऐसा कहा जाता है कि उनका जन्म माता के गर्भ में 12 महीने रहने के
 
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