पसंद करें
10
नापसंद करें

तुम्हारी दुनिया में इस तरह

सिंदूर बनकर तुम्हारे सिर पर सवार नहीं होना चाहता हूं न बिछुआ बन कर डस लेना चाहता हूं तुम्हारे कदमों की उड़ान को चूड़ियों की जंजीर में नहीं जकड़ना चाहता तुम्हारी कलाईयों की लय न मंगलसूत्र बन झुका देना चाहता हूं तुम्हारी उन्नत ग्रीवा जिसका एक सिरा बंधा ही
 
अशोक कुमार पाण्डेय