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चरित्र का दोगलापन

हम ज़रा बाहर चले गए थे इस वजह से आप लोगो से रूबरू नही हो सके !अब लौट आए हैं तो नियमित होने की कोशीश करेंगे ! असल में यार लोगो ने हमारी छवि बिगाड़ कर रख दी है ! यकीन मानिए तिवारी साहब जैसे हैं वैसे हैं !हम आपको जैसे दीख रहे हैं वैसे ही हैं ! हमारे पास
 
दीपक "तिवारी साहब"