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जिसके कारण मैं इसकी कुछ परवाह नहीं करता...........

बहाद्दुर आदमी जिन दिनों अपने जिस्म पर गहरे घाव नहीं खाता, वह समझता है कि वे दिन व्यर्थ नष्ट हो गये.........- तिरुवल्लुवरमैं पानी के भीषण प्रवाह की तरह अत्यन्त भयंकर अवसरों पर भीआगे ही बढ़ता हूँ । मानो मेरे लिए इस जान के अलावाकोई और जान भी है जिसके कारण
 
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