.......मेरी आशायें.......
अपनी मुठ्ठी में,बादलों को बांधती हूं,क्योंकि मैं उङना चाहती हूं।अपनी उंगलियों में,सितारें सजाती हूं,क्योंकि मैं उनको छूना चाहती हूं।अपने होंठों पे,मोतियों को थामती हूं,क्योंकि मैं लव्ज़ों को सजाना चाहती हूं।अपनी आंखों में,चांद छुपाती हूं,क्योंकि मैं
Jul 28 2009 06:00 AM



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