पुनश्च
तुम ताज महल होदर्शनीय, मुग्धेय,शांतिदातामुखरित, पवित्र,प्रीतिगाथापर मेरी भावना से अंजान अलग होतुम ताजमहल हो।करती तुझसे बेहद प्यार तुम आकर्षण की मूर्ति साकार तुम मेरा उत्साह,मेरी चहल-पहल होतुम ताज महल हो,तुम ताज महल हो।tउम्हर सामीप्य देता सकूँसामर्थ्य
Dec 27 2009 03:46 PM



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