निवेदन
निवेदनजीवनबहुत-बहुत छोटा है,लम्बी है तकरार!और न खींचो रार!!यूँ भी हम तुममिले देर सेजन्मों के फेरे में,मिलकर भी अनछुए रह गएदेहों के घेरे में.जग के घेरे ही क्या कम थेअपने भी घेरेरच डाले,लोकलाज के पट क्या कम थेडाल दिएशंका के ताले?कभीकाँपती पंखुडियों परतृण
Dec 20 2009 10:55 PM



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