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यही मुहब्बत है...

कड़ी धूप थीआसमान से शोले बरस रहे थे...उसने कहा-कितनी प्यारी खिली चांदनी है...मैंने कहा-बिलकुलक्योंकि...मुहब्बत में दिल की सुनी जाती है, ज़हन की नहीं यही मुहब्बत है, मुहब्बत की रिवायत है...-फ़िरदौस ख़ान
 
फ़िरदौस ख़ान
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मैं भी तुझसे क्यों न बात करूं...

वाल्ट व्हिटमेन के शब्दों में " ओ राही! अगर तुझे मुझसे बात करने की इच्छा हुई तो मैं भी तुझसे क्यों न बात करूं... ज़िन्दगी की जद्दोजहद ने इंसान को जितना मसरूफ़ बना दिया है, उतना ही उसे अकेला भी कर दिया है...हालांकि...आधुनिक संचार के साधनों ने दुनिया को एक
 
फ़िरदौस ख़ान
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मेरा महबूब

नाम : बहारों का मौसम तअरुफ़ : मेरा महबूबज़बान : शहद से शीरी लहजा : झड़ते फूलपता : फूलों की वादियां
 
फ़िरदौस ख़ान
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जब याद तुम्हारी आएगी...

इंतज़ार...किसी से मिलने की तड़प, जुदाई का दर्द, यादों की महक...कितना कुछ बसा है, इस एक लफ्ज़ में...इंतज़ार...जो मीठा भी है...और तल्ख़ भी...जिसके इंतज़ार में निगाहें राह में बिछी हों...और वो आ जाए तो इंतज़ार अहसास खुशनुमा हो जाता है...लेकिन जब वो न आए तो यही
 
फ़िरदौस ख़ान
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शायद, यही ज़िन्दगी है...

ज़िन्दगी एक सहरा है...और खुशियां सराब...इंसान जितना खुशियों को अपने दामन समा लेने के लिए आगे क़दम बढ़ाता है...खुशियां उतनी ही उससे दूर होती चली जाती हैं...शायद, यही ज़िन्दगी है... -फ़िरदौस ख़ान
 
फ़िरदौस ख़ान
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दोस्ती...रफ़ाक़त...एक अनछुआ अहसास है...

दोस्ती...रफ़ाक़त...एक अनछुआ अहसास है...रफ़ाक़त का यह जज़्बा, हवा के उस झोंके की मानिंद नहीं, जो खुली, महकी ज़ुल्फ़ों से एक पल के लिए अठखेलियां करता गुज़र जाए...किसी अनजान दिशा में...बल्कि यह तो वो दायिमी अहसास है जो रूह की गहराई में उतर जाता है...हमेशा
 
फ़िरदौस ख़ान
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तेरी एक भी सांस किसी और सांस में समाई तो...

कुछ अरसा पहले पंजाबी की एक नज़्म पढ़ी थी... जिसका एक-एक लफ़्ज़ दिल की गहराइयों में उतर गया... पेश है नज़्म का हिन्दी अनुवाद :तेरी एक भी बूंदकहीं और बरसी तोमेरा बसंतपतझड़ में बदल जाएगा...तेरी एक भी किरणकिसी और आंख में चमकी तोमेरी दुनियाअंधी हो जाएगी...तेरी एक
 
फ़िरदौस ख़ान
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किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए...

इबादत...सिर्फ़ नमाज़ पढ़ने या रोज़े रखने का ही नाम नहीं है...बल्कि इबादत का दायरा इससे भी कहीं ज़्यादा वसीह (फैला) है...किसी की आंख के आंसू अपने दामन में समेट लेना...किसी उदास चेहरे पर मुस्कराहट बनकर बिखर जाना...भी इबादत का ही एक हिस्सा है... बक़ौल निदा
 
फ़िरदौस ख़ान