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बाग़ी दिल..
तन्हा चन्दा हुआ, चाँदनी खो गयीअब ये दुनिया चले, चले न चले बुझ गया जो दीया, शम्मा भी सो गयी अब कोई लौ जले, जले न जले खामोश सागर है क्यों, क्यों लहरें हुई गुम अब जो अम्बर गले, गले न गले बाग़ी सा दिल हुआ, धड़कने थम गयी कोई गुलशन खिले, खिले न खिले जीने का कुछ
Apr 04 2010 12:31 AM



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