ढलती शाम
ढलती शामअकसर देखा करती हूँशाम ढलते-2 पंछियों का झुंड सिमट आता है एक नपे तुले क्षितिज में उड़ते हैं जो दिनभर खुले आसमां में अपनी अलबेली उड़ान पर.... शाम की इस बेला में साथी का सानिध्यपंखों की चंचलताउनकी स्वर लहरी प्रतीत होती एक पर्व सीउनके चुहलपन से बनती
Mar 11 2010 05:05 AM



Shuffle








