पसंद करें
3
नापसंद करें

जलजला कुमार ने स्‍वीकारा ढपोरशंख और मैं सगे भाई हैं

आज फिर दिन में नींद आ गई। सुबह जलजला सपने में मौजूद रहा। अब यह तो अंदाजा नहीं लग पाया कि वो कितना समय मेरे सपने में रहा। पर जब सुबह 5 बजे नींद खुली तो उसके जाने का अहसास हुआ और मैं एकदम से बिस्‍तर से उठ बैठा। एक चम्‍मच अश्‍वगंधा चूर्ण मुंह में लेकर
 
अविनाश वाचस्पति