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लन्दन से डॉ. विद्या सागर आनंद की एक रचना-------->>>दीपक 'मशाल'

आज पेश-ए-खिदमत है एक रचना वो भी एक ऐसे शायर की जो आज से ४८ साल पहले अपनी सरज़मीन को छोड़ लन्दन आ गए थे लेकिन आज भी दिल से पूरी तरह हिन्दुस्तानी ही हैं. ये हस्ती हैं डॉ. विद्या सागर आनंद जी, जिन्होंने इतिहास, कानून, राजनीति,
 
दीपक 'मशाल'