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माटी माथा के चंदन

मोर गांव के करंव बंदन,माटी माथा के चंदन।सपना सुग्घर दूनो नयनन,आड़ी-पूंजी जिनगी धन॥हरियर-हरियर खेती-खारलीपे-पोते घर-दुवार॥गंगा कस नरवा के पानी,अन धन ले भरे कोठार॥सेवा के सोंहारी बेलय,पिरित के धरे पईरथन।करमा, ददरिया, पंडवानीगली खोर म गीता बानी।घर-घर तुलसी
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari