पसंद करें
5
नापसंद करें

कब तक इसी तरह अजन्मी बच्चियों को मारते रहेंगे ?

कल न्यूज़ मे देखा कि किस तरह अहमदाबाद मे १५ कन्या भ्रूण कचरे मे मिले।जो बहुत ही शर्मनाक और दुखद है कि आखिर इतनी सारी अजन्मी बच्चियों को मारने से उन माँ-बाप और डॉक्टर को क्या मिला। कितने अफ़सोस कि बात है कि एक तरफ तो देश मे लड़कियों को आगे बढाने की बात की
 
mamta
पसंद करें
0
नापसंद करें

बाकी सब कोढ़ में खाज

—चौं रे चम्पू! आज भौत सारे सवाल पूछने ऐं, जवाब देगौ?—क्यों नहीं चचा, लेकिन बलवीर सिंह ‘रंग’ ने कहा था— ‘बहुत से प्रश्न ऐसे हैं, जो सुलझाए नहीं जाते, मगर उत्तर भी ऐसे हैं, जो बतलाए नहीं जाते।’—रंग जी की बात करकै अपनी रंगदारी मती ना दिखा। हां-ना में बात
पसंद करें
0
नापसंद करें

1411 -"मिल जाये तो मिटटी हैं खो जाये तो सोना हैं"शाश्वत सत्य

 कितनी सुंदर सुबह थी वह . अजी नहीं !  मौसम बड़ा खुबसूरत नहीं था ,न तो ठंडी हवा चल रही थी, न रिमझिम बारिश हो रही थी.न वासंती फुल खिले थे ,न हल्की- हल्की धुप बादलो से झांककर मुस्कुरा रही थी . बड़ा ही खराब मौसम था ,चिलचिलाती धुप
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
पसंद करें
0
नापसंद करें

डॉक्टर सांता.

डॉक्टर सांताने फार गंभीर चेहरा करुन हातात टॉर्च घेऊन पेशंटचे डोळे तपासले, जिभ बघितली, कान तपासले आणी......... बराच विचार करुन म्हणाला.......... टॉर्च चांगला आहे !!!
पसंद करें
4
नापसंद करें

गाँव में डॉक्टर ? ना , भई ना !

हमारे देश के डॉक्टरों ने ग्रामीण स्वास्थ्य में सुधार के लिए प्रस्तावित देहाती चिकित्सा पाठ्यक्रम का पुरजोर विरोध किया है । इस विरोध में हमारे देश के डॉक्टरों की अभिजात्य- वृत्ति छुपे नहीं छुपती । वैसे भी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के तहत देहातों में स्थापित
 
अफ़लातून
पसंद करें
6
नापसंद करें

भाई का नाम अजगर रख दें?

कभी-कभी बच्चे ऐसी बातें कह देते हैं जिसको सुनकर हंसी आ जाती है। हमारे एक मित्र ने बताया कि उनके एक डॉक्टर मित्र के एक तीन साल के बेटे ने अपने होने वाले भाई का नाम अजगर रखने की बात किस मासूमियत से कही। दरअसल इन डॉक्टर साहब के यहां एक और बच्चा होने वाल
 
राजकुमार ग्वालानी
पसंद करें
7
नापसंद करें

ये बच्चा किसका है?

एक ट्रेन के एक डिब्बे में एक डॉक्टर और नर्स सफर करते हैं। उस ट्रेन में इन दो यात्रियों के अलावा कोई नहीं रहता है। ये ट्रेन जब बिलासपुर से रायपुर पहुंचती है तो ट्रेन से उतरने पर इन दो यात्रियों के साथ एक नवजात शिशु रहता है। अब यहां पर सवाल यह है कि जो
 
राजकुमार ग्वालानी
पसंद करें
5
नापसंद करें

अस्पतालः उदासियों की भीड़ और उम्मीदों का मजमा

सुना आपने अस्पताल में था...तीन दिन और दो रात का स्टे...फ्री नहीं था...सीजनल डिस्काउंट भी नहीं था...मेडिक्लेम वालों के पास भी सौ बहाने हैं पैसे न देने के...22-23 इजेक्शंस, 12-15 टेबलेट्स, दो उनींदी रातें और कई हजार देकर किसी तरह पीछा छूटा...डॉक्टर तो
 
विवेक