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माँ

डॉ श्याम सुन्दर दीप्ति“ मम्मी, मम्मी! मेरा शार्पनर कहाँ है?”“ मौम! कुछ खाने को बना दो।”“ मौम…”बेटा बार-बार कुछ मांग रहा था।“ तू आवाज देने से न हटना। तू एक ही बार नहीं मांग सकता सब कुछ। बता, क्या मौम-मौम लगा रखी है?”वह भी परेशान थी, अपने सर्वाइकल के दर्द
 
दीपशिखा