एहसास खोए जब
लिखने बैठे हैं कुछ आजबहुत दिनों बादसोचते थेरब्त-ए-ख्यालों के जहाँ सेआवाज़ देंगे एहसासों कोकोई गीत, ग़ज़ल, कविता, नज़्म या रुबाईदौड़ी चली आयगी...हमारे दामन में आ बेनक़ाब हो जाएगी।लेकिन ये क्या ?दिल-ए-गोशा में कोई जज़्बात ही नही ,एक सुनहरी तीरगी और बाआवाज़
Mar 10 2010 12:06 AM



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