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मीडिया- बाबूजी जरा संभलना

मीडिया- बाबूजी जरा संभलना पिछले कुछ सालों में मीडिया का एक नया रूप सामने आया है। ऊंगलियों में गिने जाने वाले ये चैनल अब गली में मोड़ पर खुली परचून दुकानों की तरह ही हर कहीं नज़र आने लगे हैं। गलत तरीके से पैसे कमाने वाले सेठनुमा लोग समाज के इस चौथे स्तंभ
 
acharyakeshav
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हिन्दी ब्लाग का वैचारिक प्रभाव दिखने लगा है-आलेख (hindi blog's thought in media)

अंतर्जाल पर हिन्दी भाषा में लिख रहे लेखकों को अभी इसका अनुमान नहीं है कि संगठित प्रचार माध्यम-टीवी, रेडियो और समाचार पत्र पत्रिकाऐं-उनके ब्लाग पर नज़र रख रहे हैं। कुछ ब्लाग लेखक लिखते हैं कि इंटरनेट पर लिखने से समाज में कोई बड़ा वैचारिक बदलाव नहीं आने वाला