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टिप्पणी, टिप्पणी, टिप्पणी, टिप्पणी, टिप्पणी, टिप्पणी

दिल तो है दिल ..क्या कीजिये ??कल मन बड़ा खिन्न हुआ था टिप्पणी के  प्रति लोगों की बात सुन-सुन कर...और मैंने टिपण्णी आप्शन हटा दिया....यह नहीं कि मैंने आपकी टिप्पणी को मिस नहीं किया..बहुत किया...और अवधिया भईया की डांट, निर्मला जी की फटकार, 
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एक दिलचस्प टिप्पणी

वरिष्ठ टीवी पत्रकार श्री अंशुमान त्रिपाठी जी को मैने व्यंग्य- लुटेरों के लिए भी आचार संहिता बने- मेल किया था। जिसे पढ़ने के बाद उनकी दिलचस्पी टिप्पणी आईः संजीव संजीव भाई, लुटेरों के लिए ही आचार सहिता होती हैं। शर्माजी हमारे आपके जैसे इंसान हैं। नाईयो
 
संजीव
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टिप्पणियाँ मोडरेशन से प्रकाशन के बाद कहाँ गायब हो जाती हैं-कोई तो बताये

एक प्रश्न मेंरे दिमाग में कई दिन से घूम रहा है कि मोडरेशन से प्रकाशित करने के बाद टिप्पणियाँ ब्लॉग पर दिखती नहीं हैं, कहीं इस रास्ते में  ही बीच में गायब हो जाती है, मै इससे अचम्भित हूँ, कई बार ऐसा हो चूका है. लेकिन मुझे इस समस्या का समाधान नहीं
 
ललित शर्मा
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माइकल जैकसन और हिंदी के साहित्यकार

माइकल जैकसन का साहित्य से कोई मतलब नहीं था। माइकल ने कभी साहित्य को पढ़ा या समझा भी था, ऐसी कोई जानकारी हमें मिलती भी नहीं। अब तक माइकल जैकसन पर जितना भी कुछ टी. वी. या अखबारों में आया है, उसे सिर्फ एक महान गायक और डांसर के रूप में ही याद किया गया है
 
अंशुमाली
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कविता मतलब सवालों का सिलसिला

कविता कभी मौन रहती है, कभी चीखती है, कभी अपने एकांत में गुम हो जाती है, तो कभी सडक पर उतर संसद की ओर कूच करती है. उसकी हर गतिविधि में कोई सवाल जरूर होता है. कविता मतलब सवालों का सिलसिला... मोचीरामराँपी से उठी हुई आँखों ने मुझेक्षण-भर टटोलाऔर फिरजैसे
 
सिद्धार्थ