टिपण्णी करना और टिपण्णी पाने की चाह रखना क्या सचमुच इतना बुरा है .....!!
किसी भी पोस्ट को पढने के बाद मन में जो भी विचार उठते हैं , उनका सम्प्रेषण ही टिपण्णी है ....कलम के धनी साहित्यकारों और इस आभासी दुनिया से दूर काफी नाम कमा चुके लेखकों और लेखिकाओं को टिपण्णी मिलने या नहीं मिलने से कोई फर्क नहीं पड़ता ...मगर जिन्होंने
Jan 09 2010 05:56 AM



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