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इसे ज़रूर पढ़ें

ब्लौगर मित्रों, कुछ दिनों से देख रहा हूँ कि हिंदी ब्लौगजगत में किसी-न-किसी विषय-वस्तु को लेकर खींचातानी और वैमनस्य का माहौल बन रहा है. ऐसे माहौल में मेरा मन कर रहा है कि आपको एक प्यारी सी बच्ची की चुटीली सी एक कहानी (छोटा सा प्रसंग) सुनाया जाये. यह सभी
 
निशांत
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चलो, मेरा लिखा मत पढ़ो, पर इसको तो न छोड़ो

जब कौल कर ही लिया है, तो मैं आज कुछ न लिखूँगा.. तो आप भी कुछ न पढ़ना । आपको ब्लागवाणी पर यह ज़ब्बर टाइप शीर्षक दिखला कर यूँ ही फुसला कर बुला लूँ, और यहाँ एक वाह-वाह आलेख पकड़ा दूँ… यह ... -९९९- पूरा आलेख मूल ब्लॉगपृष्ठ पर पढ़ने हेतु शीर्षक पर
 
डा. अमर कुमार
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मे आई हैव योर अटेंशन प्लीज...

नई दिल्ली का रेलवे स्टेशन। बाहर से ही काले-पीले कई लोगों को देखकर मिस्टर एक्स बिदक सा गया। कंधे के नीचे फुदकती हुई सी कोई चीज कह रही थी कि बस अच्छा ऑप्शन है। पर कदम एक प्लेटफार्म तय कर चुके थे। प्लेटफार्म नं. 18, समय - शाम 7.30 बजे मिस्टर एक्स (चाय व
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निशांतम

अभी stumbleupon.com पर एक रोचक पेज देखा है. आप इसे देखें और बताएं आप क्या सोचते हैं. पेज पर जाने के लिए यहाँ क्लिक करें.
 
निशांत
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2012 में दुनिया ख़त्म!?

वैसे, दुनिया को बने कितने साल हो गए हैं? बिग बैंग और कॉस्मिक रेडिएशन को प्रमाण मानें तो हमारा कॉसमॉस लगभग 13 .7 अरब साल पहले अस्तित्व में आया. सूर्य और सौरमंडल की उत्पत्ति लगभग ५०० करोड़ साल पहले हुई और एक अनुमान के मुताबिक सूर्य को अभी नष्ट होने में
 
निशांत
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कुश-बबली-खुशदीप-अनूप-रचना प्रकरण से उठते सवाल

दो दिनों से देख रहा हूं कि बबलीजी द्वारा की गई पोस्ट पर कुशजी की करामाती पोस्ट के बाद अनूपजी का दृष्टिकोण और खुशदीपजी के बबलीजी के बचाव के बाद अनूपजी की पोस्ट में कही गई बातों को लेकर रचनाजी का उसपर आपत्ति जाहिर करना सभी ब्लॉगरों के बीच उत्सुकता और
 
निशांत
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जेटचे पक्षी..!!

एका (मुं) नावाच्या शहरातील प्रसंग...ब : काका आजकाल जेट चे पक्षी दिसत नाही काय झाल त्यांना?? मला रोज सकाळी शाळेत जात्तांना त्यांना पाहून मजा यायची..क : अरे बेटा काही नाही त्यांचे पक्षी ड्रायव्हर सुट्टी वर गेले ??ब : काय बोलताय काका? काय झाल त्यांना काही
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कल नागपंचमी थी

और क्या कहें! पोस्ट लिखने का कोई जुगाड़ बनता नहीं! सब तरफ घूम आये हॉट टोपिक्स की तलाश में। गूगल ट्रेंड भी छाँट मारा. कविता हमारे बस की नहीं. पहेली पूछते हैं तो शुभचिंतकों को लगता है कि हम अपना स्तर गिरा रहे हैं. सच का सामना देखा नहीं. महिलाओं का सरेआम
 
निशांत