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बिल्ली मौसी

बिल्ली मौसी घर से चलीआंख पे चश्मा हाथ में थैलाबिल्ला मौसा को बाय कहाऔर फ़ोन मिलाती आगे चली।हंस के बोले मौसा जी फ़िरचटक मटक कर कहां चलीझटक के अपनी झबरी पूंछेंआंख मटका कर झट से बोली।पहले बालीवुड जाऊंगीशाहरुख संग फ़िल्म बनाऊंगीपैसा खूब कमाऊंगीफ़िर बनारस
 
हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar
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गोरी गोरी कोयल

कोयल ने जब शीशा देखाहो गई वह तो बहुत उदासगोरी मैं कैसे बन जाऊंसोच के पहुंची वैद के पास।भालू वैद ने कूट पीस करदे दी ढेरों क्रीम दवायेंफ़ीस दवा की कीमत उसनेवसूले पूरे दो सौ पचास।क्रीम दवायें लगा लगा करसुन्दर पंख झड़े कोयल केतौबा की उसने शीशे सेफ़िर से
 
हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar
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जाड़ा--2

जाड़ा ताल ठोंक जब बोला,सूरज का सिंहासन डोला,कुहरे ने जब पांव पसारा,रास्ता भूला चांद बिचारा।छिपे सितारे ओढ़ रजाई,आसमान नहिं दिखता भाई,पेड़ और पौधे सिकुड़े सहमे,झील में किसने बरफ़ जमाई।पर्वत धरती सोये ऐसे,किसी ने उनको भंग पिलाई,सुबह हुयी सब जागें कैसे,मुर्गे ने
 
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बालगीत -भालू की साइकिल

भालू लेकर आया साइकिल कितनी प्यारी कितनी सुन्दर, कितनी प्यारी कितनी सुन्दर दौड़े देखो कैसी सर सर। भालू उछल सीट पर बैठा और लोमड़ी पीछे, फ़िर पैडल पर जोर लगाकर भालू साइकिल खींचे, पीछे भागे मोती कुत्ता साथ में रामू बंदर, भालू लेकर आया साइकिल कितनी प्यारी कि
 
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बालगीत-- बरखा रानी

झम झम झम झम बरसा पानी आई प्यारी बरखा रानी दुखी हुई अब धूप सुहानी जब से आई बरखा रानी । झूम झूम कर नाच रहे हैं सभी वृक्ष जंगल में धन्यवाद दे्ते बादल को मोर पपीहे नाच नाच के । खेलो कूदो मौज करो तुम आज के इस मौसम में नाव बना लो इक कागज की तैरा दो उसको पा
 
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नन्दू की समझदारी(भाग -३)

नन्दू की समझदारी( ३) (गीतात्मक कहानी) पर मोती को एक दिन बच्चों बांधा रस्सी में नन्दू ने चल तुझको मैं गांव घुमाऊं समझाया उसको नन्दू ने। आगे आगे तो नन्दू था पीछे ही उसके मोती था नन्दू उसको खींच रहा था मोती पें पें चीख रहा था। गुस्सा होकर फ़िर नन्दू ने म
 
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नंदू की समझदारी -(भाग-४)

नन्दू की समझदारी (भाग -४) (गीतात्मक कहानी) कुछ ही दिनों के बाद तो बच्चों नन्दू एक तोता घर लाया नाम दिया उसको मिट्ठू और सुन्दर पिंजरे में बैठाया। अब मिट्ठू और मोती के संग नन्दू खेला करता था मोती को तो दाल और रोटी मिट्ठू को मिर्च खिलाता था। रस्सी पिंजर
 
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बालगीत -बन्दर जी

कुछ बन्दर मेरे बाग में आये धमाचौकड़ी खूब मचाये पेड़ से तोड़ के पत्ती खाये पापा जी को गुस्सा आए। नजर पड़ी उनकी गमलों पर लगे नोचने फ़ूलों को सब बन्दरों ने गिराई गमले की माटी पापा ने दे मारी लाठी । दुम दबा कर बन्दर भागे पापा पीछे बन्दर आगे बन्दर बोले पें पें
 
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जी करता जोकर बन जाऊं

जोकर मुझे बना दो जी मोटी तोंद लगा दो जी। नाक गाल को खूब सजाकर गोल गोल गेंदें चिपकाकर बन्दर जैसे दांत दिखाकर रोतों को भी खूब हंसाकर। हंसा हंसा कर आंसू लाऊं जी करता जोकर बन जाऊं जोकर मुझे बना दो जी मोटी तोंद लगा दो जी। तरह तरह के खेल दिखाकर उल्टा सीधा
 
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पहाड़

कहीं पे तो आकाश को छूते कहीं पे आ धरती पर मिलते कहीं पे नीचे कहीं पे ऊंचे ऊंचे नीचे नीचे ऊंचे कितने सुन्दर हैं ये पहाड़। कहीं पे काले कहीं पे भूरे कहीं बरफ़ से ढके हुये तो कहीं बड़े पेड़ों में छुपके हरे भरे दिखते ये पहाड़ कितने सुन्दर हैं ये पहाड़। कहीं पे
 
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बालगीत - केला

ला ला ला ला ला ला लाला ला ला ला ला ला लाहरे भरे पेड़ों से भैयाबन्दर जी ने तोड़ा केलापीला पीला मीठा केलाबन्दर जी ने खाया केला।ला ला-----------------।अम्मा बाबू भैया दीदीसबको भाता है केलाक्योंकि चीनी से भी मीठाहोता है पीला केला।ला ला-----------------।पीले
 
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नन्दू की समझदारी(भाग-५)

नन्दू की समझदारी(भाग-५)(गीतात्मक कहानी)कुछ ही दिनों के बाद वहां परनन्दू के चाचा जी आयेमोती मिट्ठू की हालत कोदेख के चाचा जी मुस्काये।सोच के कुछ चाचा ने बच्चोंफ़िर नन्दू को पास बुलायामोती मिट्ठू के बारे मेंप्यार से उसको समझाया।जैसे इस धरती पर नन्दूहम मानव
 
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नन्दू की समझदारी(भाग -२)

नन्दू की समझदारी(गीतात्मक कहानी)घर के बाहर दिखा जो पिल्लाप्यारा सुन्दर झबरा पिल्लाभूल गया दुख सारे नन्दूदौड़ के गोद में ले लिया पिल्ला।पिल्ला ले घर पहुंचा नन्दूदौड़ के मां से रोटी लायाफ़िर पिल्ले को गोद में ले केलगा खिलाने रोटी नन्दू।रोटी दाल खिला पिल्ले
 
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आज हमारी छुट्टी है

आज हमारी छुट्टी हैस्कूल से हो गयी कुट्टी है।सब कुछ उल्टा पुल्टा घर मेंझाड़ू पोंछा बर्तन पल मेंअब पापा निपटायेंगेमां की हो गयी छुट्टी है।आज हमारी छुट्टी-------।पार्क में सब मिल जायेंगेमौजें खूब मनायेंगेहरी घास फ़ूलों के नीचेसोंधी सोंधी मिट्टी है।आज हमारी
 
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बालगीत--पेड़

हरे भरे देखो ये पेड़, कितने प्यारे देखो पेड़, हवा से झूमें नाचें पेड़, हमको जीवन देते पेड़। धूप में चलकर जब थक जाते, हमको गोद में लेते पेड़, मन्द हवा की थपकी देकर, मीठी नींद सुलाते पेड़ । घर के खिड़की या दरवाजे, कुर्सी मेजें बड़ी चौकियां, मीठे फ़ल से भरे टोक
 
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