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अनकहे जज़्बात

अनकहे जज़्बात एक दिन यूं ही सामना हुआ अपनी ‘कृति’ से विस्मित सी वो देख कर मुझे कहने लगी.....क्या सबब है – 2 जो तुम मेरी इतनी बांह थामे चलते हो , अपने जज़्बातों से मुझे इतना डुबोए रखते हो 1 यूं तो हैं सब अपने ये कहते रहते हो , क्यों अपने जज़्बातों से उनको
 
सुमन'मीत'
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कद्र कीजिए नातों की ( ग़ज़ल )

कद्र कीजिए नातों की,दिल से दिल की बातों की।अक्सर बहुत रुलाती हैं,यादें कुछ आघातों की।सूरज वो जो धो डाले,सारी स्याही रातों की।क्या-क्या रंग दिखाती हैं,चन्द लकीरें हाथों की।देखे ऐसे लोग बहुत,खाते जो बस बातों की। पढ़ो इबारत फुरसत में,अपने दिल के खातों
 
Hemant Snehi