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संस्मरण- उनके लिये सबसे मनहूस आदमी थे ज्योति बसु

कार्टूनिस्ट आर के लक्षमण की निगाह में- सबसे मनहूस आदमी थे ज्योति बसु वीरेन्द्र जैन कामरेड ज्योति बसु के निधन पर पूरे देश और दुनिया भर की समाजवाद में आस्था रखने वाली पार्टियों ने जिस भावुक ढंग से अपनी श्रद्धांजलियाँ दी हैं उससे पता चलता है कि उनके काम का
 
वीरेन्द्र जैन
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मुलायम की चिंता में ज्योति बसु का प्रधान मंत्री न बनने का फैसला

मुलायम की चिंता में ज्योतिबसु का प्रधानमंत्री न बनने का फैसला वीरेन्द्र जैन गत दिनों देश के वरिष्ठतम नेताओं में से एक ज्योति बसु का 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के लम्बे समय तक पोलित ब्यूरो सदस्य रहे और पार्टी के
 
वीरेन्द्र जैन
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कामरेड बसु नहीं लाल सलाम की मौत

कामरेड ज्योति बसु...लाल सलाम । मुट्ठी भिची हुई और हाथ हवा में उठाकर लाल सलाम कहने की ताकत कितने वामपंथी नेताओ में है..लगातार टेलीविजन स्क्रीन पर इसे ही देखने के लिये बैठा रहा। फोन पर ज्योति बाबू के बारे में पहले दो घंटे कमेन्ट्री करते वक्त और बाद में
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नहीं होगा बसु का अंतिम संस्कार

प्रभाकर मणि तिवारीपश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा के वरिष्ठ नेता ज्योति बसु का अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने अपना शरीर पहले ही दान कर दिया था। उनकी इच्छा के अनुरूप मंगलवार को अंतिम यात्रा के बाद उनका शव यहां सरकारी एसएसकेएम अस्पताल को सौंप
 
प्रभाकर मणि तिवारी
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बसु पर बना था वृत्तचित्र

बांग्लादेश में बचपन, लंदन में छात्र जीवन और उसके बाद पश्चिम बंगाल में सात दशक लंबे राजनीतिक जीवन की कितनी ही भूली-बिसरी यादें और घटनाएं। कोई पांच साल पहले अपने जीवन पर बनी दो घंटे लंबी डाक्यूमेंट्री को देखते हुए माकपा के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल के
 
प्रभाकर मणि तिवारी
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श्रद्धांजलि - ज्योति बसु

ज्योति बसु बुझने वाली ज्योति नहीं थेवीरेन्द्र जैनज्योति बसु की देह से चेतना चले जाने को देहांत भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि उन्होंने अपनी देह को भी मेडिकल कालेज को दान करने का निर्णय कर दिया था। उनके जीवन के बाद भी उनकी देह इस देश में चिकित्सा विज्ञान का
 
वीरेन्द्र जैन