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स्वास्थ्य पर घटे बाजार का प्रभुत्व

डॉ. ए.के. अरुण न दिनों भारत ही नहीं, लगभग पूरी दुनिया गंभीर रोगों की चुनौतियों से जूझ रही है। प्रचलित पुराने रोगों के अलावा नये उभर रहे रोगों की जानलेवा किस्में बड़े पैमाने पर कहर बरपा रही हैं। इन रोगों के खात्मे के नाम पर चलाए जाने वाले सरकारी
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इंडिया, भारत और मैनहट्टन

देविन्दर शर्मा देश ने जब उदारीकरण के रास्ते पर चलना तय किया, उसके ठीक बाद तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने सदन में जो भाषण दिया उसके पहले पैरे में उन्होंने कहा कि कृषि हमारा मुख्य सेक्टर है और इसे जब तक बिल्ड अप नहीं किया जाएगा देश की अर्थव्यवस्था
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फेल हो चुका है बाजारीकरण का मॉडल

प्रोफेसर अरुण कुमार वैश्वीकरण की शुरूआत हमारे देश में नब्बे के दशक से नहीं हुई है। यह प्रक्रिया हजारों साल से चल रही है, लेकिन शुरूआती दौर में वैश्वीकरण दोतरफा था। यानी हम दुनिया से लेते भी थे और दुनिया को देते भी थे। 1750 के बाद से यह एकतरफा होता