पसंद करें
0
नापसंद करें

चला जा रहा था

चला जा रहा थाज़िन्दगी की इस दौड मेंचिलचिलाती धूप मेंबेरंग और बेरूप मैं बस चला ही तो जा रहा था तभी नज़र आई उमडती हुई सी सावन की बदलीकभी चमकतीकभी फडकतीपल-पल दमकती जैसे हो बिजली घटाओं के पीछे हवाएं कह रही हैं सुकूं अब मिलेगा उम्मीद दे रही हैं कल की खुशियां कल
 
रवीन्द्र गोयल्