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ऐ सुनो !

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती शिखा वार्ष्णेय जी की एक कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... सुनो! पहले जब तुम रूठ जाया करते थे न,यूँ ही किसी बेकार सी बात परमैं भी बेहाल हो जाया करती थी चैन ही नहीं आता था मनाती
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सम्बन्ध आज सारे, व्यापार हो गये हैं

एक तरफ प्यार की अनुभूतियाँ हैं तो वहीँ इस प्यार का सौदा करने वाले भी पैदा हो गए हैं. रिश्ते-नाते-सम्बन्ध सभी कई बार जितने अछे लगते हैं, दूसरे ही क्षण वे बेगाने हो जाते हैं. कहीं पंचायतें प्यार का गला घोंट रहीं हैं तो कहीं आनर किलिंग के नाम पर प्यार की
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एक अलग एहसास

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटता विनोद कुमार पांडेय का एक प्रेम-गीत. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... नित पुष्प खिला कर,खुशियों के,मन बगिया महकाया तुमने,आँखों के आँसू लूट लिये,हँसना सिखलाया तुमने,सूना,वीरान,अधूरा
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ग़ज़ल

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती जय कृष्ण राय 'तुषार' की ग़ज़ल. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... सुहाना हो भले मौसम मगर अच्छा नहीं लगतासफर में तुम नहीं हो तो सफर अच्छा नहीं लगताफिजा में रंग होली के हों या मंजर दीवाली के
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मेरा हृदय अलंकृत

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटता रावेन्द्र कुमार रवि का एक प्रेम-गीत 'मेरा हृदय अलंकृत'. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... मेरा हृदय अलंकृत होकर करे न क्यों परिहास! उसे मिला है- मुग्ध चंद्रिका-सा अनुरंजित हास! बनी उदासी
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प्रेम

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती कृष्ण कुमार यादव की कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... प्रेम एक भावना हैसमर्पण है, त्याग हैप्रेम एक संयोग हैतो वियोग भी हैकिसने जाना प्रेम का मर्मदूषित कर दिया लोगों नेप्रेम की
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पीले फूल

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती संगीता स्वरुप जी की कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... मैंने यादों के दरख्त पर टांग दिए थे अपनी चाहतों के पीले फूल और देखा करती थी उनको अपनी निर्निमेष आँखों से जब भी कोई चाहत होती