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शिखर शोध निदेशक डॉ. विनयकुमार पाठक

विद्यालयीन प्राध्‍यापक, साहित्‍यकार, समीक्षक, कवि डॉ. श्री विनयकुमार पाठक का आज जन्‍म दिन है. मेरे इस ब्‍लॉग के पाठकों को इसी बहाने आज आदरणीय डॉ. विनयकुमार पाठक जी को स्‍वयं जानने और आपको जनवाने का प्रयास कर रहा हूं. पाठक जी का जन्‍म 11 जून 1946 को
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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बस्‍तर के पर्याय : गुलशेर अहमद खॉं ‘शानी’

लेखन की दुनियां में बस्‍तर सदैव लोगों के आर्कषण का केन्‍द्र रहा है। अंग्रेजी और हिन्‍दी में उपलब्‍ध बस्‍तर साहित्‍य के द्वारा संपूर्ण विश्‍व नें बस्‍तर की प्राकृतिक छटा और निच्‍छल आदिवासियों को समझने-बूझने का प्रयास किया है। साठ के दसक में छत्‍तीसगढ़ के
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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छत्‍तीसगढ़ के प्रथम मानवशास्‍त्री - डॉ. इन्‍द्रजीत सिंह

'जनजातीय समुदाय के उत्‍थान और विकास का कार्य ऐसे लोगों के हाथों होना चाहिए, जो उनके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्‍य और सामाजिक व्‍यवस्‍था को पूरी सहानुभूति के साथ समझ सकें.' गोंड जनजाति के आर्थिक जीवन पर शोध करते हुए शोध के गहरे निष्‍कर्ष में डॉ. इन्‍द्रजीत सिंह
 
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महाकवि कपिलनाथ कश्यप : महाकाव्यों के रचइता

7 मार्च . जयंती पर विशेषआज कलम पकडते ही तुरत लिखो तुरत छपो की मंशा लेकर लेखन करने वालों की फौज बढते जा रही है. किन्तु हमारे अग्रपुरूषों नें लेखन के बावजूद अपने संपूर्ण जीवन में छपास की आकांक्षा को दबाये रखा है. उन्होनें अपनी पाण्डुलिपियों को बारंबार
 
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व्यंग्य कवि कोदूराम दलित

छत्तीसगढी भाषा साहित्य के इतिहास पर नजर दौडानें मात्र से  बार बार एक नाम छत्तीसगढी कविता के क्षितिज पर चमकता है. वह है  छत्तीसगढी भाषा के ख्यात कवि कोदूराम दलित जी का.  कोदूराम दलित जी ने छत्तीसगढी कविता को एक नया आयाम दिया और इस जन भाषा
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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विष्णु प्रभाकर को विनम्र श्रद्धांजलि [आलेख] - दिव्यांशु शर्मा

आठ दशकों तक हिंदी साहित्य के आकाश में चमकने वाले श्री विष्णु प्रभाकर हमारे बीच नहीं रहे| "आवारा मसीहा" में शरत चन्द्र जैसे जटिल-चरित्र कहानीकार की जीवनी को सब के सामने लाने वाले प्रभाकर स्वयं हिंदी साहित्य जगत के मसीहा साबित हुए| प्रभाकर का जन्म १९१२
 
साहित्य-शिल्पी