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मैं रोता हूँ, तो रो लेने दो !!

बड़ी मुद्दत के बाद आज तन्हा हूँ, मैं रोता हूँ, तो रो लेने दो !! आंसू न पोछो, मुझे धीर न दो मैं रोता हूँ, तो रो लेने दो !! अपनों  को परखने की, मुझको न थी आदत ही कभी, वो छलतें है मुझको, तो छल  लेने दो.   माँगा ही
 
Sudhir (सुधीर)
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...कोई तो मेरा किस्सा पुराना मिले

वो पलटते हैं मेरी डायरी के सफे कि कोई तो मेरा किस्सा पुराना मिले, हर नज़्म नाम उनके औ' वो कहते हैं कोई तो मेरे यार का इशारा मिले कुछ उनकी नाजों-अदा और कुछ मेरी यह चुप रहने की आदत कभी तो समझे वो इन ज़ज्बातों को तो सबको एक फ़साना मिले अनुभव की चांदी जब ज
 
Sudhir (सुधीर)