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महिला दिवस पर.....माँ तुझे सलाम

आज महिला दिवस हैं. लोकसभा और विधान सभा में  महिलाओ को ३३ प्रतिशत आरक्षण मिल जायेगा. माँ इस अवसर पर मैंने सोचा क्यों न तुम्हे सलाम कह लू. आखिर तुम जननी जो हो मेरी. ९ १/२ महीने अपने गर्भ में मुझको पनाह दी और फिर सिजेरियन ऑपरेशन का दर्द झेला. तेरे
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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मेरी माँ..... मेरी प्रेरणा....मेरी आधारशिला..

माँ शब्द से इस जीवन की शरूआत होती हैं! माँ ही जीवन हैं. माँ को यह कविता समर्पित हैं मेरी माँ मेरी माँ.....मेरी प्रेरणा....मेरी आधारशिला....मेरी तपस्या मेरी जननी....मेरी माँ मेरी माँ...मेरी सोच...मेरी कहानी....मेरी विचारशक्ति....मेरी जननी....मेरी माँमेरी
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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एक सूखता गुलाब मधुशाला में.......

मेरे प्यार का गुलाबकभी खिला था मधुशाला में....मेरे प्यार का गुलाबअब सूख रहा हैं मधुशाला में.....सूख कर मिट जाताअगर शरण न मिलती मधुशाला में...निर्दयी साकी तू भी देखएक सूखता गुलाब मधुशाला में....
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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... पेश हैं बालकवि अभिषेक ......

अभिषेक मेरा दोस्त हैं , उम्र ५ साल। कुछ हिंदी की कविताये सीखी हैं। शब्दों को गोल-मोल तरीके से घुमा कर कविता बनाने की कोशिश करता हैं। "जुबी-डूबी" और "क्यूँ पैसा-पैसा करती हैं" जैसे गाने उसे बहुत पसंद आ रहें हैं। आजकल वो कुछ न कुछ बना कर सुनाता रहता हैं ।
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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...आग लगे इस कमीनी को.....

सुबह से पुराने अखबारों में घुसा पड़ा था। इस बीच लिखने वाला कीड़ा दिमाग में उछलने लगा। अब क्या लिखाजाये??दिमाग-मन-दिल की बैठक में विचार-विमर्श चल रहा था। दिल ने अपनी बात रखी। एक कविता लिखी जाएँ। दिमाग बोला, बंधू बिना कारण कविता नहीं लिखी जाएगी, अभी तुम्हे
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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...आग लगे इस कमीनी को.....

सुबह से पुराने अखबारों में घुसा पड़ा था। इस बीच लिखने वाला कीड़ा दिमाग में उछलने लगा। अब क्या लिखाजाये??दिमाग-मन-दिल की बैठक में विचार-विमर्श चल रहा था। दिल ने अपनी बात रखी। एक कविता लिखी जाएँ। दिमाग बोला, बंधू बिना कारण कविता नहीं लिखी जाएगी, अभी तुम्हे
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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बात हमे भी किसी की बुरी लगी पर हम पिचकारी नहीं चलाते

चाय समोसे और यह ब्लॉग दुनिया। मजा आ जाता हैं। दिन बीतने के बाद जब शाम को यहाँ आकर बैठो तो चाय और समोसे का मजा दस गुना हो जाता हैं। तरह तरह के ब्लॉग हैं। पोस्ट संग्रहकर्ता के रूप में ब्लॉग वाणी का जवाब नहीं। "आज की हलचल" में बेहतरीन से लेकर अच्छी पोस्ट
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बात हमे भी किसी की बुरी लगी पर हम पिचकारी नहीं चलाते

चाय समोसे और यह ब्लॉग दुनिया। मजा आ जाता हैं। दिन बीतने के बाद जब शाम को यहाँ आकर बैठो तो चाय और समोसे का मजा दस गुना हो जाता हैं। तरह तरह के ब्लॉग हैं। पोस्ट संग्रहकर्ता के रूप में ब्लॉग वाणी का जवाब नहीं। "आज की हलचल" में बेहतरीन से लेकर अच्छी पोस्ट
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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आलोचना एक कडवा अमृत

आलोचना एक कडवा अमृत हैं जो एक व्यक्ति की सोच और शैली में निखार लाता हैं। मैं आलोचना को एक शुभचिंतक द्वारा करा गया उत्थानकारी प्रयास मानता हूँ। प्रशंसा का ढोल पीटने वाले और नाक-भौं सिकोड़ने वाले तो हर गली में मिल जायेंगे परतु एक सच्चे आलोचक और शुभचिंतक का
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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...आत्महत्या करने से बेहतर हैं लड़ कर मरो....

आत्महत्या करना तो लगता हैं फैशन बन चूका हैं। रोज अख़बार में १-२ खबरे मिल ही जाती हैं। इन्टरनेट पर भी आत्महत्या के तरीके उपलब्ध हैं जिनका प्रयोग करके बच्चे और युवा अपनी जीवन लीला समाप्त कर रहें हैं। हर साल कितने ही किसान भी आत्महत्या कर लेते हैं।माना कि
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...और छुट गयी मास्टरी....१

दो साल पहले ट्यूशन पढ़ाता था। जैसे ही कॉलेज में दाखिला लिया तो कुछ बच्चो को पढ़ाने का ऑफर मिला। दो-चार महीने तो बस युहीं मजे में गुजार दिए। एक महीने मेरे पास १५०० रूपये आये। आज तक अट्ठनी नहीं कमाई थी, कुछ रूपये हाथ में आये तो पता लगा कमाना किसे कहते हैं।
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जब भुत दिखा जंगल में

दुनिया भर में भूत-प्रेत की बातें प्रचलित हैं। कानपुर से लेकर कैलिफोर्निया तक लोग भूतो की बातें करते हैं। महफिलों, पार्टियों में होने वाली गपशप का एक अभिन्न अंग हैं यह भूत चर्चा। लोग भी एक से बढ़ कर एक दावे ठोकते हैं। कोई कहता हैं ५० साल पहले मरे आदमी को
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ब्लॉग दुनिया का एक बेहतरीन ब्लॉग

यहाँ मेरा इरादा किसी ब्लॉग की विवेचना करने का नहीं हैं। इस पुनीत कार्य को करने का मुझमे साहस भी नहीं क्यूंकि मेरे ज्ञान की सीमाएं मुझे इस बात की अनुमति नहीं देती कि मैं किसी के ब्लॉग की चर्चा अपने ब्लॉग पर कर सकूँ। ब्लोगिंग करने का कोई इतना शौक भी नहीं
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मेरी माँ

मेरी प्यारी माँ - जीवन का एक दिव्य रूप जिसके आशीर्वाद से मेरा दिन शुरू होता हैं। हर मोड़ पर, हर कठिनाई में मेरे विश्वास को पोषित करने वाली, मेरे जीवन की संजीवनी हैं मेरी प्यारी माँ। कितना आसान सा उच्चारण हैं --- माँ। क्या कभी किसी बछड़े को बोलते देखा