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गांठे

जन्म के साथजिन्दगी की तरहएक सीधी-सपाट डोर थमाई थी "उसने",कहा था, इसके सहारेइसीकी तरह तुम भी चलना।अभी चलना शुरू किया ही था किरिश्ते-नातों की तमाम गठानें बान्धनी भी शुरू कर दी।जीवन को जीने, उसे मज़बूत बनाने के चक्कर मेंकितनी गांठे बान्ध ली..।और जब मुड कर
 
अमिताभ श्रीवास्तव