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शादी करोगे तो पता चलेगा... हुंह!!

Image by El_Sol via Flickrतीन साल बाद वो भूल जाती थीं... अब हम जब क्लास ६ में थे तो वो ९ में थीं, अब भला हम उनके क्लास में तो जा नहीं सकते थे.. बड़ा परेशान करती थीं.. ये भी अजीब आदत थी.. कुछ भी पूछो तो कहेंगी - अभी ६ में हो ना, जब ९ में आओगे तो पता
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मुस्कुराने की शर्त पक्की है

परिवर्तन स्रष्टि का नियम है और इन्हें टाला भी नहीं जा सकता । बिना बताये आ जाते हैं बादलों की तरह। किलकारियां कब ठहाके में बदलती है .....और ठहाके कब चिंता में पता ही नहीं चलता....बस यूँ ही उम्र गुज़र जाती है ....और एक दिन जिंदगी ख़त्म ......इंसान के जाने
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क्रांतिकारियों के पथप्रदर्शक रासबिहारी बोस

देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने वाले क्रांतिकारियों का जब जिक्र होगा, महान क्रांतिकारी रासबिहारी बोस का नाम हमेशा आदर के साथ लिया जाता रहेगा। उन्होंने न केवल देश में कई क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
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जिंदगी इको है यानी गूंज है!!!

ये कहानी मुझे गूगल के जरिये सर्च करने पर मिली !! जिसने भी लिखी है बहुत सुन्दर है!!!
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एक रानी. जो आदेश नहीं मानने पर कटवा देती थी नाक

इतिहास में कर्णावती नाम की दो रानियों का उल्लेख मिलता है । इनमें एक चित्तौड के शासक राणा संग्राम सिंह. राणा सांगा. की पत्नी थी. जिन्होंने अपने राज्य को गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह के हमले से बचाने के लिए मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजी थी जबकि दूसरी
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दिल ढूंढता है…फुर्सत के रात दिन

आजकल इस भागदौड़ भरी जिंदगी मे थकना मना है, नही नही भाई मै कोई प्रोडक्ट बेचने की कोशिश नही कर रहा हूँ, बस इस भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर कुछ पल आराम से गुजारने की सलाह दे रहा हूँ। आजकल हम लोग दिन भर ऑफिस/दुकान पर काम करते है, और शाम होते ही इस बोझ [...]
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आज भी बरकरार है ही मैन की छवि

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के ही मैन धर्मेद्र कों अपने सिने करियर के शुरूआती दौर में ऐसे दिन भी देखने पडो थे' जब निर्माता-निर्देशक उन्हें फिल्मों के लिए अनुपयुक्त बताकर घर लौट जाने की सलाह दिया करते थे। 08 दिसंबर 1935 को पंजाब के फगवाडा में जन्मे धर्मेद्र
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महंगाई ने बदली जीवन शैली

महंगाई ने पिछले एक साल में लोगों की जीवन शैली में काफी बदलाव पैदा किया है। उच्च मध्य वर्ग के परिवारों में हालांकि इस महंगाई का असर ज्यादा नहीं दिखाई देता लेकिन ऐसे परिवार भी मानते हैं कि मामूली ही सही, उनकी लाइफस्टाइल में भी बदलाव जरूर आया है। सब्जिय
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छोटी उम्र में ही हो गई फॉंसी की सजा

महज १८ साल की उम्र में फाँसी चढ गए थे खुदीराम बोस खुदीराम बोस ने केवल १८ साल की उम्र में मुजफ्फ्रपुर के मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड की बग्घी पर बम फ्केंने के ऐसे दुस्साहस को अंजाम दिया जिसके बाद देश में क्रांतिकारी घटनाओं की बाढ आ गई और जिससे तानाशाह अंग्
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संघर्षमय रहा नेपाल से मुंबई तक का सफर- उदित नारायण

आकाशवाणी' नेपाल से अपने कैरियर की शुरुआत करके शोहरत की बुंलदियों तक पहुंचने वाले बालीवुड के प्रसिद्ध पाश्र्वगायक उदित नारायण आज भी अपने गानों से श्रोताओं के दिलों पर राज करते है । उदित नारायण झा का जन्म पेपाल में एक दिसंबर १९५५ को मध्यम वर्गीय ब्राह्
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सरकार के खिलाफ बोलने वाला शायर: फैज

नहीं विसाल मयस्सर तो आरजू ही सही भारतीय उपमहाद्वीप के महान शायर फैज अहमद फैज ने अपने मुल्क पाकिस्तान की जनता को दु:ख तकलीफोंं से निजात दिलाने और देश में सच्ची जम्हूरियत लाने की कोशिश की, लेकिन सरकार के तानाशाही रवैए के कारण उन्हें इसके लिए चार साल की
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बाल कालाकारों का जलवा भी कम नहीं

यूं तो हिन्दी सिनेमा युवा प्रधान है और समूचा सिने उद्योग युवा. उसकी सोच और मांग को ध्यान में रखकर फिल्मों का निर्माण करता है लेकिन बाल कलाकारों ने इस व्यवस्था को अपने दमदार अभिनय से लगातार चुनौती दी है। फिल्म ब्लैक में आयशा कपूर और तारे जमीं पर में द
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...एक ईमानदार जीवनी पर बवाल क्यों!

मैत्रेयी पुष्पा 'हजारों साल का इतिहास है कि स्त्री के लिए पति रूपी पुरुष मालिक है, स्वामी है। बराबरी की बात सिर्फ बात है, जो व्यवहार में लागू होने से आज तक कतरा रही है।' ऊपर लिखे वाक्यों को सोचते हुए मेरे मन में उन सवालों की उमड़-घुमड़ रही, जिन्हे पुरु
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....महानायक के चार दशक

महानायक की 40 वर्ष में 40 महत्वपूर्ण हिन्दी सिनेमा जगत में महानायक के रप में मशहूर अमिताभ बच्चन ने फिल्म इंडस्ट्री में 40 वर्ष पूरे कर लिए है और 1969 में प्रदशत फिल्म सात हिंदुस्तानी से शुरू हुआ उनका फिल्मी सफर आज भी जारी है । वर्ष 1969 में ख्वाजा अह
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....रूप और अभिनय दोनों में अव्‍वल माला‍ सिन्‍हा

प्रसिध्द अभिनेत्री माला सिन्हा बालीवुड की उन चंद अदाकाराओं में हैं. जिनमें खूबसूरती के साथ बेहतरीन अभिनय का भी संगम देखने को मिलता है। ग्यारह नवम्बर 1936 को जन्मी माला सिन्हा अभिनेत्री नगस से प्रभावित थीं और बचपन से ही उन्हीं की तरह अभिनेत्री बनने का
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....जिन्‍ना की खबर लेने वाले मौलाना आजाद

जन्मदिन 11नवम्बर पर विशेष पाकिस्तान आज जिन आंतरिक मतभेदों औेर अन्तवरोधों से जूझते हुए अपना वजूद बचाने की जो लडाई लड रहा है.उसे आजादी के महानायकों में शुमार मौलाना अबुल कलाम आजाद ने उसी समय देख लिया था. जब मुस्लिम लीग के प्रमुख मोहम्मद अली जिन्ना ने प
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खलनायकी को नया आयाम दिया प्रेमनाथ ने

हिन्दी सिनेमा में प्रेम नाथ को एक ऐसे अभिनेता के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने नायक के रप में फिल्म इंडस्ट्री पर राज करने के बावजूद खलनायकी को नया आयाम देकर दर्शकों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी । पचास के दशक में प्रेम नाथ ने कई फिल्मों में नायक
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.....ऐश्वर्या की प्रसिध्दि पहुँची सात समुंदर पार

ऐश्वर्या राय हिन्दी फिल्म जगत की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में एक हैं जिन्होंने फिल्मों में अभिनेत्रियों क ो महज शोपीस के तौर पर इस्तेमाल किये जाने की परंपरागत सोच को न सिर्फ बदला बल्कि बालीवुड को अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष पहचान भी दिलाई । हम दिल द
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क्या आपको अमर होने से डर लगता है?

क्या अमर होना इतनी बड़ी नेमत है कि उसके लिए तबसे मारामारी जारी है, जबसे इंसान ने सोचना-समझना शुरू किया? लगता तो यही है। इंसान को सबसे बड़ा डर इस सचाई से लगता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद एक दिन उसे संसार से जाना होगा। मौत ही है जो देवताओं से उसे कमतर
 
संजय खाती
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........वो लड़की

नीरज नैयर हमारा समाज जिसे नारी उत्थान के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाले पुरुष प्रधान कहना पसंद करते हैं, इस समाज में हमेशा से ही महिलाओं को कमजोर माना जाता है और शायद यही वजह है कि अब उन्होंने अपनी कमजोर छवि का फायदा उठाना सीख लिया है. आज न जाने कितने
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हिंदी फिल्‍मों के राजकुमार : प्रदीप कुमार

हिन्दी सिनेमा में प्रदीप कुमार को ऐसे अभिनेता के तौर पर याद किया जाता है. जिन्होंने 50 और साठ के दशक में अपने ऐतिहासिक किरदारों के जरिये दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया । पचास और साठ के दशक में फिल्मकारों को अपनी फिल्मों के लिए जब भी किसी राजा- महाराजा
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डिग्रियां रोक नहीं पाई पक्षियों के प्रति दीवानगी

पक्षियों और प्रकृति के प्रति गहरा लगाव रखने वाले जाने माने पक्षी विज्ञानी डा.सालिम अली को केवल एमएससी या पीएचडी की डिग्री के अभाव में पक्षी विज्ञानी की नौकरी से वंचित होना पड़ा था, फिर भी पक्षियों के प्रति उनकी दीवानगी कम नहीं हुई। बर्डमैन आफ इंडिया
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आखिर कैसे घरों में रहते हैं अरबपति

हम असर सोचते होंगे कि बड़े लोगों का घर कितना बड़ा होता होगा? कैसे रहते होंगे वे इतने बड़े घर में? या घर में उन्हें सुकून मिलता होगा? दूर से कैसा लगता होगा, उनका घर? यदि हमें एक दिन के लिए ऐसे घर में रहने को मिल जाए, तो हम कैसा महसूस ·करेंगे? या उनका घर
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कभी अलविदा ना कहना

आज जन्मदिवस पर विशेष हम हैं राही प्यार के हमसे कुछ न बोलिए जो भी प्यार से मिला हम उसी के हो लिए, अपने गाए गीत की इन पंक्तियों को जीवन का फलसफा मानने वाले किशोर कुमार ने पाश्र्वगायिका लता मंगेशकर के साथ सैकड़ो सुपरहिट गीत गाए हैं। इसके बावजूद बहुत कम
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आखिर कब रुकेगी महंगाई

सरकार ने शिक्षा एवं चिकित्सा दोनों महंगी कर रखी हैं। मकान किराया कई गुना बढ़ गया है। आवासीय समस्या से चिंतित लोगों को सरकार ने आवासीय योजनाओं के तहत झुनझुना पकड़ाया। ढंग का मकान बना पाना एक बहुत ही मुश्किल काम हो गया। पति-पत्नी दोनों कमाऊ हैं तो जुगा
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मोटापे से परेशान हैं

अगर आप मोटापे से परेशान हैं, तो वजन घटाने के लिए वेट मैनेजमेंट में ट्रेंड फिजिशियन के पास ही जाएं, वरना इसके घातक नतीजे भी हो सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मोटापे को बीमारी करार दिया है। ऑॅस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में हुई दसवीं इंटरन
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चुनमुन का स्कूल का पहला दिन

भारती परिमल स्कूल का पहला दिन, भला इस दिन को कौन याद रखना नहीं चाहेगा? यही दिन तो होता है, जब एक बच्चे को पहली बार घर से बाहर एक अलग ही दुनिया से वास्ता पड़ता है।यह एक ऐसी दुनिया होती है, जहाँ उसे प्यार मिले, तो वह उसे ही अपना दूसरा घर मान लेता है, पर
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श्रद्धांजलिः खामोश हुई सरोद की सुर लहरियाँ

उस्ताद अली अकबर खान अब हमारे बीच नहीं हैं। सरोद की सुर लहरियाँ अब खामोश हो गई हैं। उनका जाना एक ऐसा स्थान रिक्त कर गया है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकता। वे चले गए, पर उनकी बनाई गई धुनें हमेशा हमारे साथ रहेंगी। हर भारतवासी उन पर गर्व करता है। जानेमाने सर
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आओ पियें, प्यार के कटोरे में गंगा का पानी

इलाहाबाद .यह कार्यशालाएं हैं छोटी-छोटी लेकिन इनके संदेश बड़े हैं। इनमें शामिल बच्चे न हिंदू हैं न और न मुसलमान। वे सिर्फ बच्चे हैं और हिंदुस्तानियत के मूल भाव में ही बड़े होना चाहते हैं। इसीलिए करेली के आशीष कुमार की कुरान की आयतें पढ़ते हुए जरा सी भी
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काल और देश की सीमा से परे ओमपुरी

जन्मदिन- 18 अक्टूबर, 1950 जन्मस्थान- अंबाला,पंजाब कद- 5 फुट 10 इंच ओमपुरी भारतीय सिनेमा के कालजयी अभिनेताओं की सूची में शुमार हैं। उनके अभिनय का हर अंदाज दर्शकों को प्रभावित करता है। रूपहले पर्दे पर जब, उनका हंसता-मुस्कुराता चेहरा दिखता है तो दर्शकों
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संवेदनाओं के पंख

स्लम डॉग दुनिया की सबसे बड़ी झोपड़ पट्टी धारावी की गरीबी और जिल्लत भरी जिंदगी पर बनी फिल्म स्लमडॉग मिलिनेयर की झोली में सोमवार की सुबह जब एक के बाद एक 8 आस्कर अवार्ड गिरे, तो पूरा हिन्दुस्तान खुशी से झूम उठा, लेकिन इस खुशी को मनाते समय हर देशवासी का दि