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जेएनयू में जातिवादी चेतना का जहर

      सुनने में अटपटा लगता है लेकिन वास्तविकता है कि जेएनयू के सांस्कृतिक वातावरण में जातिवाद का विष आ गया है। जेएनयू लंबे समय तक जातिवाद के जहर से मुक्त था। लेकिन आज ऐसा नहीं है। मैं लंबे समय वहां पढ़ा हूँ और एक भावनात्मक लगाव भी
 
jagadishwar chaturvedi
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महाकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर की 150वीं जयन्ती पर विशेष- अकुंठ मानव का खुला आसमान-2- अरुण माहेश्वरी

      सवाल उठता है कि आखिर यह पीराली क्या बला है? अगर हम इसकी तह में जाए तो भारतीय समाज में जातियों के उद्भव और विकास के अपने एक बेहद रोचक और उतने ही यातनापूर्ण आख्यान के सूत्रों को भी पकड़ पायेंगे। किसका किससे मेल होने अथवा कौन सा
 
jagadishwar chaturvedi
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महाकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर की 150वीं जयन्ती पर विशेष- अकुंठ मानव का खुला आसमान-1- अरुण माहेश्वरी

(महाकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर)19वीं सदी के बंगाल के किसी महापुरुष की जिंदगी में झांके और उसके कुल–गोत्र का जिक्र न हो, यह कैसे संभव है? इसकी वजह यह नहीं कि किसी भी हिंदू धर्मावलंबी महापुरुष का जीवन चरित उसके कुलगोत्र की गहराइयों में जाए बिना नहीं समझा जा
 
jagadishwar chaturvedi