आराम की रोटी
जसवीर राणा ‘लगता है तीन बज चले होंगे! …सूरज भी ढल गया!…पर सरदार अब तक रोटी लेकर नहीं आया…।’ चहबच्चे की मुंडेर पर बैठे नीलू ने सूरज की ओर देखा। एक क्षण के लिए उसके चेहरे पर अफसोस-सा पसर गया। लेकिन अगले ही पल उसे चारपाई पर पड़े बीमार बाप की बात याद
Jun 03 2010 07:21 AM



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