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जनसंघ से जसवंत तक

हिंदुवादी विचारधारा को आधार बनाकर राष्ट्रवाद के नारे के साथ सन् 1925 में डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की थी। तब यह महज सामाजिक व सांस्कृतिक संगठन हुआ करता था। लेकिन, आगे चलकर इसके सदस्यों को लगा कि बिना राजनैतिक ताकत
 
रईस अहमद 'लाली'
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मेजर साहब के बहाने

जिन्ना का जिन्न फिर बोतल से बाहर निकला। इस बार हसरतें पूरी हुईं आडवाणी और राजनाथ की। और शिकार बने जसवंत सिंह। एक तयशुदा रणनीति के तहत उनकी पार्टी से विदाई की इबारत लिख दी गई। न कोई नोटिस, न सफाई का कोई मौका। चिंतन बैठक से ठीक एक दिन पहले फोन पर फरमान
 
रईस अहमद 'लाली'
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जिन्ना, भारत का विभाजन और आज़ादी

भारत में हाल के वर्षों में किसी किताब ने ऐसी हलचल पैदा नहीं की है जैसी भाजपा के अब भूतपूर्व हो गए नेता जसवंत सिंह की हाल ही में प्रकाशित किताब जिन्ना - इंडिया पार्टीशन इंडिपेंडेंस ने की है. इस एक किताब ने जसवंत सिंह को ‘हनुमान से रावण’ बना दिया है. यह
 
डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल
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जिन्ना, जसवंत और भारत का भविष्य

जिन्ना पर जसवंत सिंह द्वारा लिखी गई किताब (जिन्ना – भारत विभाजन के आईने में, राजपाल एंड सन्स, रु. 599) के प्रकाशित होते ही जसवंत को भाजपा से निष्पासित कर दिया गया और गुजरात में पुस्तक पर बैन लगा दिया गया।दोनों ही बातें हमारे वैचारिक परिपक्वता पर प्रश्न
 
बालसुब्रमण्यम
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भारतीय जिन्‍ना पार्टी

भारतीय जनता पार्टी का नाम एक बार फिर बदलता दिखा। भारतीय जनता पार्टी से भारतीय जिन्‍ना पार्टी। नाम नहीं बदले इसलिए पार्टी ने जिन्‍ना का गुणगान करने वाले जसवन्‍त सिंह को ही बाहर निकाल दिया। जसवंत सिंह ने अपनी किताब में जिन्‍ना के बारे में नहीं लिखा है
 
Anurag Harsh
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बीजेपी को करना ही होगा "सच का सामना"

बीजेपी के बुज़ुर्ग नेता जसवंत सिंह की बेतरह बिदाई ने एक बार फ़िर पार्टी की अंतर्कलह और अंतर्द्वंद्व को सरेराह ला खड़ा किया है । जिन्ना मुद्दे पर पार्टी लाइन से अलग हटकर अपनी बेबाक राय जगज़ाहिर करने का खमियाज़ा आखिरकार जसवंत सिंह को भुगतना ही पड़ा । लेकिन चिंतन
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क्या भारतीय जनता पार्टी खत्म हो रही है

भारतीय जनता पार्टी भारत की दूसरे नंबर की सबसे बड़ी पार्टी है | इस पार्टी ने अपनी शुरूआत हिन्दू एजेंडे के साथ की थी | हिन्दू कौन ? हिन्दू वह जो अपने राष्ट्र से प्यार करे | शुरू में भावना यही थी | शायद इसी विचार धारा के कारण राजपूत समाज जो हमेशा ही अपने
 
नरेश सिह राठौङ
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फिर जिन्ना पर आया प्यार

हमारे देश में कुछ नेताओं का चिंतन इतना फिजूल है कि इससे केवल उनका बौद्धिक विलास झलकता है और यह भी जाहिर होता है कि वे जमीनी हकीकत से कितने कटे हुए हैं। आज अनेक समस्याएं विकराल रूप ले चुकी हैं, लेकिन इन नेताओं का शर्मनाक अतीत में झांकने का शौक देश की आम
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)