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जवाब चाहता हूं मैं

कहानी की तरह हूं..पानी की तरह हूंचाहता हूं...छुपाना खुद को..पल भर की जवानी की तरह हूंखोजता हूं खुद को...लेकिन खो जाता हूं..लगता है रेगिस्तान में मृग की तरह हूंवक्त के साथ बदलना चाहता हूं लेकिन समय थमता नहीं लिखता हूं ..मिटाता हूंचाहता हूं..छुपाता हूं खुद
 
acharyakeshav
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अच्छा प्रश्न है,हम अवश्य जवाब देंगे

जय श्री राम ........... | मित्रो,हमारे BLOGSPOT वाले ब्लॉग पर एक सुधि पाठक वैतरणी जी ने एक प्रश्न के रूप में अपनी राय लिखी है | इन्होंने लिखा है-"क्या आप समझते है कि पूरी दुनिया की उथल-पुथल को सिर्फ़ दस अंकों में ईश्वर ने कोडिफाई कर रखा है ? इस तरह
 
Dr.KUMAR GANESHE 369
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जैसे अमावस का चांद हो.........

समीर जी (उङनतश्तरी) को जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाऐं। आप हमेशा हमारी होसला अफजाई करते रहे और हमें टिपियाते रहें। मोतीचूर का बहुत बङा लड्डू हमारी और से आपके लिए। हम ढूंढते रहते है,नज़रें उठाके उसको,जाने कहां छुपके बैठा है,वो, बादल की ओट में।पत्थरा गई ये
 
PREETI BARTHWAL
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