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माता वैष्णों देवी दर्शन

जम्मू पहुँचे, कटरा पहुँचे, पर्ची कटाई, जयकारा लगाया और शुरू कर दी चढाई। चौदह किलोमीटर की पैदल चढाई। दो किलोमीटर के बाद बाणगंगा पुल है। यहाँ चेकपोस्ट भी है। सभी यात्रियों की गहन सुरक्षा जांच होती है। पर्ची की चेकिंग भी यहीं होती है। वैसे तो कटरा से
 
नीरज मुसाफिर जाट
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शिव का स्थान है - शिवखोडी

एक बार की बात है। एक असुर था- भस्मासुर। उसने शिवजी से वरदान ले लिया था कि वो जिसके सिर पर भी हाथ रखेगा, भस्म हो जायेगा। इसका पहला प्रयोग उसने शिवजी पर ही करना चाहा। शिवजी की जब जान पर बन आयी तो शिवजी जान बचाकर दौडे। लेकिन भस्मासुर भी कोई लंगडा नही था,
 
नीरज मुसाफिर जाट
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जम्मू से कटरा

उस दिन जम्मू मेल करीब एक घण्टे देरी से जम्मू पहुँची। यह गाडी आगे ऊधमपुर भी जाती है। मैने प्रस्ताव रखा कि ऊधमपुर ही चलते हैं, वहाँ से कटरा चले जायेंगे। लेकिन प्रस्ताव पारित होने से पहले ही गिर गया। यह 27 दिसम्बर 2009 की सुबह थी। जाडों में कहीं जाने की यही
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चलूँ, बुलावा आया है

पुरानी दिल्ली के स्टेशन से रात को नौ बजे एक ट्रेन चलती है- जम्मू के लिए (4033 जम्मू मेल)। शुरूआती दिमाग तो रोहित ने ही लगाया था। दिवाली पर ही कह दिया था कि दिसम्बर में वैष्णों देवी चलेंगे। तभी मैंने एकदम रिजर्वेशन करा लिया कि कहीं रोहित बाद में मना ना कर
 
नीरज जाट जी
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जम्मू-ऊधमपुर रेल लाइन

2009 के आखिर में वैष्णों देवी के दर्शन करने जम्मू गया तो वापसी में कटरा से सीधा ऊधमपुर पहुँच गया। वहां से दोपहर बाद जम्मू जाने के लिए एक पैसेंजर ट्रेन पकड़ी। इस मार्ग पर सफ़र करके दिमाग में आया कि वैष्णों देवी का यात्रा वृत्तान्त तो होता रहेगा, पहले
 
नीरज जाट जी