अभ्यास, ट्रेनिंग और परीक्षा
जंग की दुनिया भी अजीब दुनिया है. वहां गोली और गोलों की भाषा में ही बात होती है. वहां जान लेना भी एक कर्त्तव्य और जान देना भी एक कर्त्तव्य. मैदान चाहे कोई भी हो...जंग के असूल आम तौर पर एक जैसे होते है. जिस तस्वीर को आप देख रहे हैं उसमें आप
May 25 2010 09:14 PM



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