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अभ्यास, ट्रेनिंग और परीक्षा

जंग की दुनिया भी अजीब दुनिया है. वहां गोली और गोलों की भाषा में ही बात होती है. वहां जान लेना भी एक कर्त्तव्य और जान देना भी एक कर्त्तव्य. मैदान चाहे कोई भी हो...जंग के असूल आम तौर पर एक जैसे होते है. जिस तस्वीर को आप देख रहे हैं उसमें आप
 
Rector Kathuria
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ग़ज़ल

दुनिया को मेरा जुर्म बता क्यूँ नहीं देते ? मुजरिम हूँ तो फिर मुझको सजा क्यूं नहीं देते ?  बतला नहीं सकते अगर दुनिया को मेरा जुर्म ! इल्जाम नया मुझ पे लगा क्यूं नहीं देते ? मुश्किल मेरी आसान क्यूं बना क्यूं नहीं देते ! थोड़ी सी ज़हर मुझको पिला क्य
 
Rector Kathuria
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ग़ज़ल

दुनिया  को  असल बात बता क्यूं नहीं देते ! लफ़्ज़ों की करामात दिखा क्यूं नहीं देते ? ज़ालिम का हर नकाब उठा क्यूं नहीं देते! लोगों को उसकी शक्ल दिखा क्यूं नहीं देते ? ज़ुल्मों की दास्तान सुना क्यूं नहीं देते ! कलमों से इक तूफ़ान उठा क्यूं नहीं देत
 
Rector Kathuria
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