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एक चर्चा – शायद सुधार की दिशा तय हो सके Few things to reform our Education system & Health in Poor India.

मुख्य मुद्दे की ओर बढ़ने से पहले मैं आपको अपने बचपन की एक घटना सुनाना चाहूँगा. एक छोटे से शहर का विद्यार्थी जो हमेशा सोचता था राष्ट्र में समग्र प्रगति और मजबूत तंत्र हो. आये दिन कक्षा में होने वाले गतिविधियों जिसमे विषय होता था “हम अपने देश और समाज
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हमारा संविधान ही हमारा धर्मग्रन्थ है.

बड़ी अजीब स्थिति है की एक साधारण सी बात को समझने समझाने में बड़े बड़े तर्कों का सहारा लेना पड़ रहा है. मोटे तौर पर किसी भी सम्प्रदाय में धर्म ग्रन्थ का दो ही उद्देश्य है. कोई अकेला व्यक्ति किस प्रकार अपने आप को ईश्वर का साक्षी मान इस संसार में अपने [...]
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लम्हों ने खता की और सदियों ने सजा पाई

भारतीय स्वाधीनता दिवस १५-अगस्त. यह १५ अगस्त हर साल आता है. और हम सभी देशवासी गर्व से स्वंतंत्रता दिवस मनाते हैं. साथ ही बंटवारे की त्रासद घटना को भी याद करते हैं. किसी शायर (अभी नाम याद नहीं) की यह पंक्तिया “लम्हों ने खता की और सदियों ने सजा