द्विजेन्द्र द्विज के ‘जन-गण-मन’ पर प्रसिद्ध समालोचक कैलाश कौशल की समीक्षा
जन के मन की बेहतरी में ग़ज़लहिन्दी ग़ज़ल में द्विजेन्द्र ‘द्विज’ का अपना एक ख़ास मुक़ाम है। उनके ग़ज़ल संग्रह `जन-गण –मन’ में 56 ग़ज़लें संकलित हैं। जन के मन से जुड़ी इन ग़ज़लों में ‘द्विज’ ने जीवन , समाज और संस्कृति और समय के यथार्थ से बिंधे अनेक पहलू
May 27 2010 11:22 AM



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