पिछले कई दिनों से मै जगजीत सिंह जी की गायी इस नज्म को कई बार सुन चुका हूं लेकिन इस मे कुछ तो है जो मुझे बार -२ सुनने को प्रेरित करती है , हां , शायद इन दोहों के बोल ही हैं जो जिंदंगी की वास्तविकता को करीब से देखने की प्रेरणा देते हैं. आज जब रहा न गया