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मेहतर

जबकि सभी यह अच्छी तरह समझ गए थे कि बौद्धों के बाद भारत में ज्ञान-विज्ञान में कोई तरक्की हुई न आगे किसी भाँति संभावना है.तब से लेकर पिछले दो हज़ार नौ तक का सब नकल है.सदा की तरह यहाँ सबकुछ उधार या आयातित ही रहा आएगा.क़रीब क़रीब सारे ऐसे ही अंग्रेज़ीदां
 
शशिभूषण
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आलोचना

एक आदमी ने रोटी पकाई.खाते-पीते मित्र को खाने पर बुलाया.ज़िद करके खाना खिलाया.वह अघाया मित्र दिन भर खाते रहने का आदी हो चला था.इसलिए इंकार न कर सका.अनमना खाता रहा.जिज्ञासु मेज़बान से रहा न गया तो उसने मेजबानी में आत्मीयता जोड़ते हुए पूछ लिया-.क्या रोटी
 
शशिभूषण
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शर्म

यह एक बड़ा सालाना आयोजन था.एक भूतपूर्व प्रसिद्ध उद्योगपति की याद में उन्हीं के नाम से स्थापित हिंदी का सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक सम्मान समारोह.इसमें कई विधाओं के लिए वार्षिक पुरस्कार दिए जानेवाले थे.हॉल खचाखच भरे होने की भी समुचित व्यवस्था की गई थी.बड़े-बड़े
 
शशिभूषण