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आप भी लिखे ..................दो पन्क्तियां.............

आज देखिए बेटे की ये पेन्टिंग ......................और पढिए इस पर मेरे दिल से निकली ये पन्क्तियां............. जाने कब से घूम रहा था ,थका समय का पहिया । पीठ टिकाकर थोडा सुस्ताया,जगह देख कर बढिया ॥ अब आप भी लिखे ........इस पर आपके दिल से
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तरलता से ही जुड़ते तुम..

तुम नहीं होयह अनुभव नयन सजल कर देता है,तुम्हारा होना भीआँखे भर देता है ।तरलता से ही जुड़ते तुमहर कहीं, कभीं भी ।
 
हेमन्त कुमार
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गुनाह

गुनाह किया जो मैंने उसकी न कोई माफ़ी है तेरी आँख से गिरी टप से वो बूंद यही सजा मेरे लिए काफी है.  
 
sangeeta swarup
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ऐतबार

ख्वाहिशे सुलगती हैं दिल बेचैन है नजारों पर नज़रें टिकती नहीं हैं ऐतबार भी नहीं अब तो किसी पैगाम पर रात के बाद सुबह होती नहीं है
 
sangeeta swarup
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ख्वाब

निकल कर गिरह से एक ख्वाब पूरा हुआ अब वो ख्वाब नहीं हकीकत था
 
sangeeta swarup