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मैं हरिद्वार गया था, अमर ने इस्तीफा दे दिया

मैं हरिद्वार गया था। पिछले लेख में इसकी चर्चा कर चूका हूँ। मगर अपनी यात्रा का पूरा ब्यौरा नहीं दे पाया था। पेशे से पत्रकार हूँ इसलिए बताये बिना मानूंगा नहीं। डेल्ही से बस में सवार होकर मैं हरिद्वार अपनी दीदी के घर पहुंचा। जाते समय मुझे सिर्फ अपनी भांजी
 
Neeraj Tiwari
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अजय कुमार झा उर्फ झा जी कहिन अवकाश पर

 अजय  कुमार झा उर्फ झा जी कहिन अवकाश पर
 
डॉ महेश सिन्हा
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लम्हा-दर-लम्हा जीने का मौसम

नींद की चाशनी को आसमान से बरसती बूँदों ने धो दिया... आ खड़े हुए सावन के मंडवे तले। अदरक घुली, भाप उड़ाती गर्म चाय और पार्श्व में बज रही ठुमरी--घिर-घिर आई बदरिया कारी... नहीं यह ना तो किसी कहानी का हिस्सा है और न ही किसी विजुअल का....ये जीने के मौसम क
 
डॉ. अमिता नीरव