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पहली और अंतिम चेतावनी --- ब्लॉग पर बनने वालीं एसोसिएशन का पंजीकरण करवाएं

ये बहुत हो गया ड्रामा, अब ये सब नहीं चलेगा। हाँ जी, सही कह रहे हैं, जिसे देखो वो ब्लॉग के नाम पर तमाम तरह की एसोसिएशन बनाने निकल पड़ा है। अब ऐसा ज्यादा नहीं चलेगा। कोई वरिष्ठ के नाम पर तो कोई जूनियर के नाम पर, किसी ने किड्स एसोसिएशन बनाई है तो अभी-अभी
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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सहवाग की माँ की गलत शिकायत --- लड़कियां ऐसा नहीं कर सकतीं हैं...

समाचारों के द्वारा पता चला कि सहवाग की माँ ने बोर्ड से कहा है कि लड़कियों को खिलाड़ियों से दूर रखा जाये। ध्यान दीजिए लड़कियों को दूर रखा जाये... अर्थात लड़कियाँ खिलाड़ियों के पास आतीं हैं।यह बिलकुल गलत बयानबाजी है सहवाग की माँ की। यह लड़कियों को बदनाम करने की
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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ये डिग्रियां भी बाँटी जातीं हैं पड़ोस में...

इन डिग्रियों के बारे में क्या आपको पता है?नहीं?अरे! क्या कह रहे हैं जनाब?ये सारी डिग्रियाँ हमारे पड़ोस में बहुत ही आसानी से उपलब्ध हैं।एक निगाह डाल ही लीजिये, इन पर---B.E. = Bomb Engineering M.B.B.S. = Member of Bomb Blasting Society I.I.T = Islamic
 
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महामशीन के महाप्रयोग का कहीं तो असर दिखाओ यारो!!!

समाचारों के माध्यम से पता चला कि यूरोप की उड़ानें फिर से चालू कर दी गईं हैं। यह कोई समाचार प्रसारित करने के उद्देश्य से नहीं वरन् एक विशेष मानसिकता को उद्घाटित करने के उद्देश्य से कहा गया है।पिछले दिनों समाचार यह भी सुनने को मिला था कि महामशीन को शुरू
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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पाकिस्तान को गरियाओ नहीं, अब वे हमारे रिश्तेदार होने जा रहे हैं, वो भी मान!!

शादी सानिया की और दिक्कत मीडिया को, राजनेताओं को, आम आदमी को....और भी बहुतों को (इन बहुतों में ब्लॉगर्स भी शामिल हैं।) आज हम भी हो लिए, लगा कि ऐसा न हो कि समय के ज्यादा निकलते ही कहीं ये मुद्दा पुराना न पड़ जाये और हम तब लिखने बैठें जब कोई पढ़ने वाला ही न
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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हे भगवान्! हमें किस पुरातन युग में पैदा कर दिया था

हाय रे! हम किस समय में पैदा हो गये थे? हाय रे! हमारे समय में खुशबू जैसी कोई हीरोइन क्यों नहीं हुई? हे भगवान! हमारे समय में अदालतों ने ऐसे क्रांतिकारी निर्णय क्यों नहीं दिये? हाय राम!, हाय रे! हे भगवान!.......और कितना चिल्लायें, कोई अब तो सुन लो। जबसे
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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भगवान के साथ भी आदमी का व्यापार चालू है

इधर देखने में आया है कि आदमी ने अपनी फितरत में परिवर्तन तो किये ही हैं, इन्हीं परिवर्तनों के साथ उसने अपने आराध्यों के रूप-रंग में भी परिवर्तन कर दिये हैं। व्यक्ति अपने कार्य और स्वभाव के अनुसार अपने लक्षणों को बदलता रहता है ठीक उसी तरह वह भगवानों,
 
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अबे यार! कल एक 'डे' सूना-सूना निकल गया ! ! !

गनपत- क्या यार! क्यों शान्त-शान्त से बैठे हो? मुँहफट- कुछ नहीं यार! कल एक डे निकल गया और हमें कानों-कान खबर भी नहीं हो सकी। गनपत- कौन सा डे, बे? हम तो सारे के सारे डे, दिवस, त्यौहार अपनी डायरी में नोट किया घूमते रहते हैं। हमारी डायरी में तो कल के किसी
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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"स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है"

दृश्य देखिये इस लोकतंत्र का---------------- एक जिला ---- जालौनविधायक ----- चारविशेष ----- इसमें तीन राज्य सरकार दल बहुजन समाज पार्टी के हैं। -----------------------------------------------------------सांसद ---- चारलोक सभा से एकराज्य सभा से तीनविशेष
 
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मंहगाई पर वित्त-मंत्री की नादान कोशिशों के लिए उन्हें माफ़ करिए

हाय! ये आह एक हमारी नहीं, हर उस व्यक्ति की है जो बाजार के कुअवसरों से दो-चार होता है। बाजार का नजारा और इस नजारे के बीच सामानों के दामों का आसमान पर चढ़े होना। बहुत प्रयास किया गया हमारे वित्त-मंत्री जी की ओर से किन्तु सामानों के दाम हैं कि नीचे आने को
 
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आरक्षण हमें भी दे दो

महिला आरक्षण विधेयक के अन्दर आरक्षण की माँग को लेकर हंगामा करने की जरूरत नहीं है। देश ही आरक्षण के सहारे चल रहा है।मुस्लिमों की बात हो रही है, दलित-पिछड़ों की बात हो रही है....... तो विवाद के बजाय आरक्षण हमें भी दे दो। हम हिन्दू हैं हमें भी आरक्षण दे दो,
 
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शर्मनाक! शर्मनाक!! शर्मनाक!!! शर्मनाक!!!! शर्मनाक!!!!!

शर्मनाक! महिला आरक्षण विधेयक संसद में पेश तो हुआ किन्तु पारित नहीं हो सका।शर्मनाक! संसद के दोनों सदनों में हंगामा होता रहा और सरकार की ओर से किसी तरह की कठोर कार्यवाही नहीं की गई।शर्मनाक! दलितों, पिछड़ों के लिए आरक्षण की माँग कर विधेयक का विरोध करने वाले
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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भारत रत्न के लिए सचिन से भी श्रेष्ठ व्यक्तित्व हैं इस देश में

सचिन के एकदिवसीय मैच में दोहरे शतक के रिकार्ड के बाद उनको भारत रत्न दिये जाने की माँग ने जोर पकड़ा है। स्वयं सचिन ने भी इसके लिए लगभग अपनी इच्छा जता दी है।एक सवाल कि क्या देश में सचिन के अलावा कोई भी और ऐसा नहीं है जिसे देश के सर्वोच्च अलंकरण से नवाजा जा
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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आइये, मिल कर बचाओ-बचाओ खेलते हैं

आजकल बचाओ-बचाओ की आवाज रोज ही सुनाई दे रही है। कभी बाघों को बचाने की आवाज, कभी पेपर बचाने की आवाज, कभी गैस बचाने की आवाज, कभी पर्यावरण को बचाने की आवाज, कभी पानी बचाओ की आवाज, कभी बेटी बचाओ की आवाज.......................। हर तरह से बचाने का काम चल भी रहा
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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बेटियों-बहुओं की ह्त्या करने वाले बाघ बचाने में लगे हैं !!!

देश की जनता में एकदम से बाघों को बचाने की होड़ शुरू हो गई है। लिख-लिख कर कागज काले कर डाले (वैसे अब कागज काले करने की जरूरत नहीं ब्लाग जो है) टी-शर्ट पहन डाली और भी जो तमाशा हो सकता था किया। सवाल ये उठता है कि बाघों की ये संख्या एकाएक तो कम नहीं हो गई?
 
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भारतीय संस्कृति में है ही क्या जो इसे बचाया जाए

प्रेम दिवस बीत गया, क्या कहा, कुछ समझे नहीं? अरे भई! समझने को रखा ही क्या है विदेशी संस्करण का हिन्दी रूपान्तरण है ये प्रेम दिवस। जी हाँ, अब सही समझे आप, वेलेण्टाइन डे का हिन्दी अनुवाद।(छवि गूगल छवियों से साभार)=======================हम रहते हैं भारत देश
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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‘खातव्यम् तो मरतव्यम्, न खातव्यम् तो मरतव्यम्, ताक धिना-धिन क्यों करतव्यम्

चलिए, देश के सिर पर आया एक बहुत बड़ा संकट टल गया। शाहरुख खान की फिल्म माई नेम इज खान शिवसेना के लाख विरोध के बाद भी आखिरकार रिलीज हो ही गई। (चित्र गूगल छवियों से साभार)========================हम सभी के लिए यह गौरवशाली क्षण है क्योंकि यदि यह फिल्म अपने समय
 
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पाकिस्तान का समर्थन करने वालों को पाकिस्तान में छोड़ देना चाहिए

पूरे मुम्बई में भय का साम्राज्य है और पूरे देश की नजरों में इसे बस खुरापात नाम दिया जा रहा है। कितना कुछ अलग होता है किसी भी घटना को देखने का तरीका। शिवसेना द्वारा विरोध किया जा रहा है और समूचे देश में इसे गलत करार दिया गया। देना भी चाहिए आखिर किसी भी
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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अपने आसपास के राजनीतिक हाकर को पहचानिए !!!

पिछले कुछ वर्षों से राजनीति में जिस तरह का क्षरण देखने को मिल रहा है वह चिन्ता का विषय होना चाहिए। कहने को तो चिन्ता का विषय है किन्तु चिन्ता किसी को नहीं है। हम सभी आपस में मिल कर बैठते हैं, चर्चा करते हैं और फिर राजनीति को, लोकतन्त्र को, देश को उसी हाल
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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पढ़ के तो देखो - गद्य और पद्य का अद्भुत साम्य है नयी कविता

समय की स्थिति भी बड़ी अजब है, कभी एकदम पास, बहुत ही आराम से गुजरता लगता है और कभी उसकी रफ्तार को पकड़ पाना सम्भव नहीं होता। कैसे दिन शुरू होकर कब रात के आगोश में आ जाता है इसका अंदाज ही नहीं हो पाता है। सुबह उठे तो तरोताजा और मन में बहुत कुछ कर गुजरने
 
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कसाब साहब द्वारा पैदा किए घाव का जन्मदिन है आज

मुम्बई आतंकी हमले वाले कसाब साहब द्वारा पैदा गये घाव का जन्मदिन है आज 26 नवम्बर 2009 को।
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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ये राजनीति है भैये, यहाँ सब चलता है......

ये हैं हमारे नये दोस्त................दिन गुजरे...............ये नहीं हैं हमारे दोस्त!!!! क्या हो गया ये? अरे भई ये समाज की हकीकत कम भारतीय राजनीति की हकीकत ज्यादा है। आज चर्चा गलियारों में चर्चा है मुलायम-कल्याण की। मुलायम का कल्याण तो उसी दिन हो गय
 
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गाँव में चलते हैं छः तथा सात रुपये के नोट

इस बार गंभीर सा नहीं, कुछ हल्का-फुल्का हो जाए....... ---------------------- एक गाँव में रात के समय एक शहरी ठग पहुँचा। उसने सोचा कि रात के अँधेरे में गाँव के किसी बूढ़े व्यक्ति को ठगा जाये। ऐसा सोच वह एक छोटी सी दुकान पर पहुँचा, दुकान पर एक बहुत ही बुज
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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एक पहेली हमारी भी बूझो...माइक्रो पोस्ट

एक साल से ऊपर हो गया है ब्लाग पर किन्तु अभी भी ब्लाग संसार पर दूसरों की नकल कर करके स्वयं को ब्लागर सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में बहुत दिनों से देख रहे थे कि ब्लाग पर पहेली बूझने-बुझाने का भी चलन सा बढ़ता जा रहा है, लगा कि ब्लागिंग में
 
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माइक्रो पोस्ट - पानी के लिए भटके फिरें......

बचपन में एक दोहा पढ़ रखा था- रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून। पानी गये न ऊबरे, मोती, मानुष, चून।। आज का दोहा, इसी सन्दर्भ में- मानुष पानी राखते, बिन पानी सब सून। पानी को भटके फिरें, धरती हो या मून।।
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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राखी ने बनाया अप्रैल फूल....????

राखी ने बनाया अप्रैल फूल....???? इस वीडियो को हमारे एक मित्र ने भेजा था। इधर समझ नहीं आ रहा था कि आप लोगों तक इसे कब भेजा जाये। तभी खबर मिली कि राखी स्वयंवर कर रही है। लगा कि कहीं फूल तो नहीं बनाया जा रहा है? बस मौका यही समझ आया इस वीडियो को दिखाने क
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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आस के सहारे चलती जनता

एक नट करतब दिखाने के लिए शहर में जगह-जगह अपनी लड़की के साथ जाता। जहाँ भी उसे सही जगह दिखती या फिर कायदे की भीड़ दिखती तो वह वहीं पर डेरा जमा कर करतब दिखाना शुरू कर देता। वह अपना सारा सामान एक गधे के ऊपर लाद कर ले जाता। गधा भी एकदम कमजोर किन्तु पूरी तन्
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर