छत
छत घर की छत पर दीवारों के कोनों में उगते कुछ नन्हें पौधे केवल नमीं के सहारे जीते ये पौधे कितनी ही बार नोंच कर फेंक दिए हैं मैंने हर बार न जाने कहाँ से अपने अस्तित्व को बचाने को ढूँढ ही लाते हैं कुछ नमी अपने आस-पास फिर उसी नमी की गोद में पलते बढ़ते पन
Dec 06 2009 05:38 PM



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